सहारनपुर। फिटनेस प्रमाण पत्र न लेने वाले तथा ऑन रोड चलते पाए जाने वाले खटारा वाहनों की अब खैर नहीं। अभियान चलाकर खटारा वाहनों को सीज करने की तैयारी है। आरटीओ ने सभी स्कूली वाहनों केे आठ अप्रैल को उनके कार्यालय पहुंचकर फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त करने को कहा है। अन्यथा की स्थिति में कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।
कस्बों ही नहीं, शहर में भी बड़ी संख्या में खटारा वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। स्कूली बच्चों को लाने और ले जाने में लगे वाहनों में भी ज्यादातर खटारा हैं, जिनको रंग रोगन कर नया दर्शाया गया है। पिछले वर्ष एआरटीओ ने खटारा स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया था, मगर सफल नहीं हो सका। इस बार विभाग अधिक सख्ती के मूड में है। आरटीओ ने बताया कि उनके कार्यालय में आठ अप्रैल को स्कूली वाहनों की फिटनेस की जांच कर उनको प्रमाण पत्र दिए जाएंगे। ऐसे में प्रत्येक वाहन स्वामी को चाहिए कि वह अपने वाहन को फिटनेस के लिए सुबह दस बजे भेजे। फिटनेस प्रमाण पत्र न लेने वाले वाहनों के खिलाफ जल्द ही अभियान चलाया जाएगा, जिसमें कोई सुनवाई बिना फिटनेस प्रमाण पत्र वाले वाहनों की नहीं होगी। उधर, डीआईओएस आरके तिवारी की ओर से भी सभी सीबीएसई, आईसीएसई, यूपी बोर्ड और डिग्री व इंजीनियरिंग कॉलेजों को वाहनों की फिटनेस के लिए सर्कुलर जारी किया गया है।
वैन और टेंपो का प्रयोग प्रतिबंधित
स्कूली बच्चों को अवैध रूप से वैन या टेंपो से स्कूल भेजना प्रतिबंधित है। इसके अलावा एलपीजी सिलेंडर लगे वाहन भी स्कूली बच्चों को नहीं ले जा सकते हैं। जो विद्यार्थी वाहन चलाने के लिए अधिकृत नहीं हैं। ऐसे बच्चों का स्कूल में वाहन लाने पर पाबंदी है। अभिभावक भी इसका ख्याल रखें। यदि कोई दुर्घटना होती है तो उसके लिए स्कूल प्रशासन जिम्मेदार होगा।
क्या हैं मानक
- वाहन का फिटनेस प्रमाण पत्र परिवहन विभाग का होना चाहिए।
- वाहन का शैक्षणिक संस्था के नाम से पंजीकरण होना अनिवार्य है।
- निजी ऑपरेटर भी अपने वाहन को स्कूल के मानक के अनुसार पंजीकृत कराकर स्कूल बस के रूप में प्रयोग कर सकते हैं, मगर कांट्रेक्ट केरिज का प्रमाण पत्र लेना होगा।
- प्रत्येक बस के आगे और पीछे मोटे अक्षरों में स्कूल बस लिखा होना जरूरी।
- कोई भी स्कूल बस किराये की फुटकर सवारी नहीं ढो सकती।
- प्रत्येक स्कूल बस पर स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर लिखा होना अनिवार्य।
- स्कूल बसों की अधिकतम आयु 15 वर्ष होगी।
- प्रत्येक स्कूल बस में बच्चों के नाम की सूची, पता, कक्षा, ब्लड ग्रुप, रूट चार्ट उपलब्ध होना जरूरी।
- चालक के साथ बच्चों की सुरक्षा के लिए सहायक का होना जरूरी।
- स्कूली बसों का रंग गोल्डन येलो विद ब्राउन और ब्लू लाइन होना चाहिए।
- सीटिंग क्षमता के अनुसार प्रत्येक बस में अग्निशमन यंत्र अनिवार्य।
- प्रत्येक बस में फर्स्ट एड बॉक्स रखना अनिवार्य।
- प्रेशर हॉर्न या टोनल साउंड सिस्टम प्रतिबंधित है।
- बसों के शीशे और चैनल ऐसे हों कि बच्चे गर्दन बाहर न निकाल सकें।