विशेषज्ञों ने वसंत कालीन गन्ना बुवाई पर दिया जोर
देवबंद (सहारनपुर)। कपूरी गोविंदपुर में रविवार को त्रिवेणी शुगर मिल द्वारा कृषक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें गन्ना विशेषज्ञों ने किसानों को वसंतकालीन गन्ना बुवाई के साथ फसल में लगने वाले ग्रासी सूट समेत अन्य रोगों से बचाव के टिप्स दिए।
गोष्ठी में गन्ना अधिकारी सेठपाल सिंह ने कहा कि किसानों को वसंत कालीन गन्ना बुवाई के समय सावधानी बरतनी चाहिए। सुझाव दिया कि किसान बीज का चुनाव स्वस्थ व निरोगी खेत से करें। गन्ना बीज की कटाई से 10-15 दिन पूर्व खेत की सिंचाई करना जरूरी है। गन्ने का बीज हमेशा दो-दो आंख के टुकड़े काटकर ही बोना चाहिए। बीज की बुवाई रक्सिल 50 ग्राम व गाउचो 100 मिली. प्रति एकड़ से उपचारित करने के उपरांत ही करें। उपचारित बीज की बुवाई आठ घंटे से पहले करना अनिवार्य है। प्रति एकड़ बुवाई में रामबाण दवा की 180-200 किग्रा. मात्रा, पोटाश 30-40 किग्रा. सूक्ष्म पोषक तत्व 2 किग्रा. मात्रा होनी चाहिए। उपरोक्त उर्वरक मात्रा को 100 किग्रा. बायो कंपोस्ट में मिश्रण बनाकर लाइन में प्रयोग करें। कहा कि ग्रासी सूट गन्ने की खतरनाक बीमारी है। इसके प्रभावित झुंड को बीज कटाई से दस दिन पूर्व निकाल देना चाहिए। सुधीर बालियान ने वसंत कालीन गन्ना बुआई में संतुलित उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी। बताया कि गन्ना बुआई के लिए खेत तैयारी के समय व्यूवेरिया बैसियाना दो किग्रा प्रति एकड़ के हिसाब से खेत में डालना चाहिए। इससे फसल सफेद सुंडी व दीमक से बचेगी। बीएस तोमर व अनुज कुमार ने अधिक पैदावार के लिए नवीनतम उन्नतशील गन्ना प्रजातियों को-0238, को-118, को-98014, कोजा-88, कोसा-8272 की बुआई करने का किसानों से आह्वान किया।