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इस्लाम ने महिला को जितने हक दिए किसी दूसरे धर्म नहीं: इफ्फत

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तीन तलाक बिल के विरोध को मिल रहा समर्थन : नदीम
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देवबंद (सहारनपुर)। मदरसा माहद आयशा सिद्दीका कासिम उलूम लिलबनात की प्रबंधक इफ्फत नदीम ने कहा कि तीन तलाक बिल को लेकर शरीयत हमारा सम्मान शीर्षक से किए जा रहे विरोध के तहत विभिन्न स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जबकि सोशल मीडिया पर उन्हें भरपूर समर्थन मिल रहा है।
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सोमवार को आयोजित बैठक में इफ्फत नदीम ने कहा कि तीन तलाक बिल राज्यसभा में पेश न हो इसके लिए एक सप्ताह तक विरोध का जो कार्यक्रम बनाया गया था उसमें उन्हें शत प्रतिशत कामयाबी मिल रही है। कार्यक्रम के तहत जहां सोशल मीडिया पर प्रतिदिन बिल के विरोध में लेख डाले जा रहे हैं। वहीं, संस्था की छात्राएं अलग अलग स्थानों पर जाकर कार्यक्रम कर रही हैं और महिलाओं में जागरूकता पैदा कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक कश्मीर, असम, बिजनौर, दिल्ली, चांदपुर, मुरादाबाद, फतेहपुर, गंगोह, हापुड़, यमुना नगर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर आदि शहरों में संगठन से जुड़ी महिलाएं और छात्रा प्रतिदिन 20 से 50 कार्यक्रमों का आयोजन कर रही हैं। उनका उद्देश्य मुस्लिम महिलाओं में शरीयत को लेकर जागरूकता पैदा करना है। उन्होंने कहा कि इस्लाम धर्म ने महिलाओं को जो हक दिए हैं वे किसी दूसरे धर्म में नहीं है। कहा कि देश की समृद्धि और विकास के लिए जिन्हें काम करना चाहिए था, वो आज इस्लामिक ज्ञान में त्रुटि निकाल रहे हैं। जबकि यह बात साफ है कि इस्लाम में जितने अधिकार महिलाओं को दिए गए हैं उतने किसी दूसरे धर्म में नहीं मिले हैं। इफ्फत नदीम ने कहा कि तीन तलाक बिल को राज्यसभा में पेश करने से पहले सरकार इस पर उलमा से सलाह मशविरा करें और उसके बाद कोई कदम उठाए। क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया जाता तो यह बिल देश की महिला वर्ग के लिए बहुत ही हानिकारक साबित होगा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाएं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ खड़ी हैं। इस मौके पर सायरा, फातिमा, शमशीदा, सना, खालिदा, आयशा, बुशरा, तसमिया, सालेहा, राबिया, राशिदा, जुबैदा, हंसा, फरहाना, गुलअफशा, बरीरा आदि मौजूद रहीं।
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