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मदरसों की मान्यता को लेकर फंसेंगे अधिकारी

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सहारनपुर। जिले में बड़े पैमाने पर मदरसों में फर्जीवाड़ा का खुुलासा हो चुका है, लेकिन बिना अस्तित्व के कैसे मदरसों को मान्यता दे दी गई। जिलाधिकारी के निर्देश पर इसकी जांच शुरू हो गई है। मान्यता देने वाले जिला अल्पसंख्यक विभाग के तत्कालीन अधिकारी इस मामले में फंसेंगे।
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जिले में 725 मान्यता प्राप्त मदरसे थे। प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद शासन ने मदरसा संचालकों को ऑनलाइन पंजीकरण कराने के लिए कहा था। सहारनपुर में 634 मदरसा संचालकों ने पंजीकरण कराया, लेकिन 91 मदरसों की ओर से पंजीकरण नहीं कराया गया। जनपद में पहले चरण की कार्रवाई में जिला अल्पसंख्यक विभाग ने 91 में से 29 मदरसों को नोटिस जारी किया था। इनमें से 12 मदरसों के संचालकों ने जवाब दिया। जिलाधिकारी द्वारा गठित की गई टीम ने जांच की तो 17 मदरसे सिर्फ कागजों में चलते मिले थे। इन मदरसों द्वारा छात्रों के नाम पर सरकार से वजीफा भी लिया गया। इसके अलावा अन्य आर्थिक सहायता भी शासन से प्राप्त की। इसकी जांच जिलाधिकारी के निर्देश पर शुरू हो गई है। जांच पड़ताल में इन 17 मदरसों को मान्यता देने वाले तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक विभाग के अधिकारी भी फंसेंगे। इन मदरसों को 2009 से 2013 के बीच मान्यता मिली थी, जबकि यह मदरसे अस्तित्व में ही नहीं हैं। डीएम पीके पांडेय ने बताया कि एक-एक मदरसे की जांच कराई जा रही है। मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। शासन को पूरे मामले से अवगत करा दिया गया है।

मदरसों के नाम पर बड़ा गोलमाल
सहारनपुर। मदरसों के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। सरकारी धन का गोलमाल किया जा रहा है। योगी सरकार ने मदरसों का ऑनलाइन पंजीकरण कराना शुरू किया तो फर्जीवाड़ा सामने आया है। अभी तक 17 मदरसों पर ही कार्रवाई हुई है। बाकी पंजीकरण ना कराने वाले मदरसों को जिला अल्पसंख्यक विभाग नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है। जिला अल्पसंख्यक अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह ने बताया मतगणना के बाद कार्रवाई तेज की जाएगी।
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