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जुलूस निकालकर खुद को किया लहुलूहान

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जुलूस निकालकर खुद को किया लहुलूहान
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सहारनपुर। मुहर्रम के कार्यक्रमों के तहत करबला के शहीद हजरत कासिम अलैहिस्सलाम की याद में मातमी जुलूस निकाला गया। अकीदतमंदों ने मातम कर खुद को लहूलुहान कर दिया।
यह जुलूस मोहल्ला जाफर नवाज स्थित बड़ी इमाम बारगाह से शुरू होकर मटिया महल, मोरगंज बाजार, भगत सिंह चौक, बड़तला यादगार, दीनानाथ बाजार, पुराना बजाजा, सर्राफा बाजार, नखासा बाजार, चौक मुत्रीबान से होता हुआ छोटी इमाम बारगाह मोहल्ला अंसारियन पहुंचा। यहां कुछ देर रुकने के बाद जुुलूस बड़तला यादगार, अंसारियान, मोहल्ला संज्ञान, गौरी शंकर बाजार, मस्जिद शेख फारूख, नया बाजार, जामा मस्जिद कला, सब्जी मंडी पुल होते हुए बड़ी इमाम बारगाह जाफर नवाज में पहुंचकर संपन्न हुआ। जुलूस में अकीदतमंदों ने भारी तादाद में जंजीरों से बंधी छुरियों, कमाह और हाथों से चोट पहुंचाकर लहुलूूहान किया। सभी गमजदा लोग काले कपड़े पहने थे। ये सभी नंगे पैर गरेबान चाक और मातम करते हुए चल रहे थे।
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अकीदतमंद या हुसैन, या अली, या अब्बास, हाय सकीना, हाय प्यास की आवाज बुलंद कर रहे थे। जुलूस में सबसे आगे ऊंट, घोड़े, बैलगाड़ियाें पर बैठे बच्चों ने काले कपड़े पहन रखे थे। उनके पीछे शबीह अलम हजरत अब्बास अलैहिस्सलाम को लेकर युसूफ हैदर जैदी और अंजुमने इमामिया तथा अंजुमने अकबरिया चल रही थी। नौहा मिर्जा आयाज, मिर्जा मेहरबान, ख्वाजा आसिफ रजा, शहबाज काजमी, शुजा काजमी, मिर्जा नईम, मुमताज, अली अहमद आदि ने पढ़ा। जुलूस में जुलजुनाह की लगाम ख्वाजा हसन मोहम्मद, कैसर अब्बास, मुनीर अब्बास आदि ने पकड़ रखी थी। संचालन बड़ी इमाम बारगाह के प्रबंधक डा. अथर अब्बास जैदी ने किया। इस दौरान मेहंदी, मंजर हुसैन काजमी, डा. कौसर, काजी अकरम, प्यारे मियां, सकलैन रजा, सलामत हुसैन, जिया अब्बास, शबाब हैद, मिर्जा अहसान सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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