सहारनपुर। जिले की धरती वैसे तो कई मायनों में ऐतिहासिक है, लेकिन अगर शौर्य और वीरता की बात करें तो यहां के सपूतों ने हमेशा से ही सिर ऊंचा किया है। चाहे जंगे आजादी हो, भारत-पाक युद्ध या कारगिल की लड़ाई, सहारनपुर के वीर सीमा पर दुश्मनों के दांत के खट्टे करते रहे हैं। शहीद जयद्रथ की शहादत के बाद भी बड़गांव कस्बे के लोग अब अपने लाड़लों को सीमा पर भेजने को तैयार हैं। उनका कहना है कि अगर पाक से आर-पार की जंग हो तो वे अपने बेटों को सीमा पर भेजने से पीछे नहीं हटेंगे।
देश की सुरक्षा में तैनात शहीद जयद्रथ की शहादत ने हर किसी के आंखों को नम कर दिया है। मगर, वीरों के शौर्य से सहारनपुर का सीना भी गर्व से चौड़ा हो जाता है। कारगिल युद्ध में गंगोह के जेहरा गांव के राजेश बैरागी, बड़गांव के दल्हेड़ी निवासी अरविंद कुमार और कुपवाड़ा में वर्ष 2003 में हवलदार वेदप्रकाश सिंह की शहादत ने सहारनपुर को गौरवान्वित किया था। इसके अलावा सरसावा एयरबेस का हेलीकाप्टर यूनिट सीमा पर जवानों को हथियार और रसद आपूूर्ति के दौरान दुश्मनों के निशाने पर आ गया था। उसमें चार जवान शहीद हो गए थे। जयद्रथ की शहादत ने एक बार फिर उन शहीदों की याद ताजा करा दी। उधर, भगवानपुर के ग्रामीणों ने अपने और भी बेटों को मातृभूमि की रक्षा के लिये सीमा पर भेजने को तैयार हैं। लेकिन केन्द्र सरकार के नरम रवैये के चलते ग्रामीणों में भारी रोष बना है। ग्रामीणों ने अब और शहादत रोकने के लिये सर्जिकल स्ट्राइक नहीं, बल्कि पाक से आरपार की जंग की सरकार से मांग की हैं। मात्र चौदह सौ की आबादी वाले गांव भगवानपुर के करीब सत्तर युवक देश की सुरक्षा में तैनात हैं। यहां के कई ग्रामीणों ने अपने अकेले अकेले बेटे भी सेना में भेज रखा है। यहां के निवासी सैनिक अनिल, धर्मसिंह, सोनू व मोनू, सुधीर, जयकरण, अंकुर व संजय के परिजनों ने जयद्रथ की इस शहादत पर गहरी नाराजगी भी जताई है।
सहारनपुर से रुड़की रवाना हुआ शहीद का शव
शहीद जयद्रथ का पार्थिव शरीर सेना के विशेष विमान से सरसावा एयरफोर्स स्टेशन पर लाया गया। यहां से कड़ी सुरक्षा में उसे रुड़की ले जाया गया। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि रुड़की से रविवार सुबह पूरे सैन्य सम्मान से शहीद का शव उनके गांव भगवानपुर ले जाया जाएगा। यहां राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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सांत्वना देने वालों का लगा रहा तांता
शहीद के परिजनों को सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। पूर्व विधायक शशीबाला पुंडीर, इमरान मसूद, अजीत राणा, रणदीप पुंडीर सहित अन्य लोगों ने परिजनों का ढांढस बंधाया।