चिलकाना (सहारनपुर)। पद्मश्री आचार्य भारत भूषण ने कहा कि शिक्षक को बच्चों का विश्वास जीतने के लिए खुद पर विश्वास होना चाहिए, तभी वह एक अच्छा शिक्षक बन सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक ही एकमात्र ऐसा सम्मानीय पद है, जिसका राष्ट्रपति भी सम्मान करते हैं।
बृहस्पतिवार को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान पटनी में दो दिवसीय योगाभ्यास प्रतियोगिता का शुभारंभ हुआ। प्रतियोगिता में डायट के डीएलएड 2017-18 के प्रशिक्षुओं के साथ-साथ जनपद के विभिन्न प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों के 34 शिक्षकों ने भी प्रतिभाग किया। पद्मश्री भारत भूषण ने कहा कि योग की आवश्यकता प्रत्येक स्तर के व्यक्ति तथा समाज को है। योग का आधार श्वंास है। अगर हम योग से श्वंास को बचा लेते हैं तो अपने जीवन को अमूल्य बना लेते हैं। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष वह देश है, जहां सबसे पहले योग की शुरुआत हुई थी।
डायट प्राचार्य राजसिंह यादव ने कहा कि योग की एक विद्या प्रणायाम के माध्यम से श्वास की आवृत्ति को नियंत्रित किया जा सकता है। इस प्रक्रिया से आयु में वृद्धि के साथ-साथ जीवन जीने की गुणवत्ता का भी सुधार होता है। उन्होंने प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं से योग के प्रति जागरूकता पैदा करने का आवाहन किया। वरिष्ठ प्रवक्ता मूलचंद वर्मा ने भी प्रशिक्षुओं को योग करने के लिए प्रेरित किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में अनीता, सीमा गुप्ता, प्रियंका शर्मा तथा प्रीति रही।
इस दौरान प्रशिक्षण प्रभारी डा. देवेंद्र कुमार, पूजा यादव, मुकेश कुमार, विजय कुमार, रविंद्र कुमार, विजय पाल सिंह, फैसल खान, विवेक चौहान, नारायण शर्मा, सौरभ कुमार, शालिनी वर्मा, ममता, पूजा आदि उपस्थित रहे।