सहारनपुर। एक साल पूर्व अलीगढ़ से कश्मीरी छात्र लापता हुआ और आतंकी संगठन के संपर्क में आ गया, फिर ग्रेटर नोएडा का छात्र उसी अंदाज में लापता होकर आतंकी बन बैठा। अब देवबंद से जैश ए मोहम्मद के दो सक्रिय सदस्य गिरफ्तार हुए, जो जम्मू कश्मीर के रहने वाले हैं। वह युवाओं को जेहाद के नाम पर बरगलाकर आतंकी संगठन से जोड़ने की कोशिशें कर कर रहे थे।
आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के इस कदम से इतना तो स्पष्ट है कि जम्मू कश्मीर में जिस तरह से सेना ने आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया और जैश ए मोहम्मद के कमांडरों का सफाया किया, उससे आतंकी संगठन नए कमांडर बनाने में जुट गया है और कश्मीरी युवा ही इस संगठन की निगाह में सॉफ्ट टारगेट हैं। इसकी वजह यह है कि कश्मीरी युवकों से संपर्क साधने और उनको अपनी बात समझाने में आसानी रहे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जैश-ए-मोहम्मद की सक्रियता से कई खतरे भी भविष्य के लिए पैदा हो रहे हैं। इसके लिए पुलिस और खुफिया विभाग को पहले से ज्यादा चौकन्ना होना पड़ेगा।
खतरनाक है आतंकियों के मंसूबे
देवबंद से पकड़े गए आरोपियों के मंसूबे बेहद खतरनाक थे। एटीएस को आरोपियों के पास से जो सामग्री मिली और पूछताछ की गई, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। मालूम चला है कि युवाओं को गिरफ्तार आरोपियों द्वारा जेहाद के नाम पर भड़काने की कोशिश की जा रही थी। युवाओं का ब्रेन वॉश करके ऐसा खूंखार बनाना था, जिसके दिलो दिमाग से मौत का खौफ भी निकल जाए। आतंकी संगठन की नजरों में इस तरह से मानव बम तैयार किए जाते हैं।
आखिर कितने दिन से देवबंद में थे आतंकी
देवबंद में नाज मंजिल (छात्रावास) के संचालक ने बताया कि शाहनवाज और आकिब अहमद मलिक एक फरवरी को ही देवबंद में उनके छात्रावास में पहुंचे, जबकि सूत्रों से मालूम चल रहा है कि यह कई महीने से देवबंद क्षेत्र में ही घूम रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दोनों आरोपी कितने दिन से देवबंद में रह रहे थे।
इन तथ्यों पर जांच कर रही एटीएस
- कश्मीर से आकर यहां कब से छिपकर रह रहे थे
- इनके और कौन कौन से साथी हैं
- क्या यह किसी को जैश में भर्ती करने में सफल हुए
- इनके पास धन कैसे आया और कितना आया
- आतंकी भर्ती के बाद इनके टारगेट और क्या क्या थे