देवबंद (सहारनपुर)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयोध्या बुलाने और राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर अनशन पर बैठे महंत परमहंस दास को पुलिस द्वारा जबरन उठाए जाने व उनके समर्थकों को जेल भेजे जाने पर मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत ने कड़ा रोष व्यक्त किया है। संस्था के पदाधिकारियों का कहना है कि किसी भी धर्म के गुरु के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी दशा में उचित नहीं है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है।
मंगलवार को स्थानीय कार्यालय पर आयोजित बैठक में संरक्षक अथर उस्मानी ने कहा कि पुलिस द्वारा वृद्ध संत का जबरन अनशन समाप्त कराया जाना बेहद निंदनीय है। धर्मगुरुओं का सम्मान होना बेहद जरूरी है। चाहे वो किसी भी धर्म से जुड़ा क्यों न हो। पुलिस महंत से वार्ता कर उन्हें समझा भी सकती थी, लेकिन पुलिस ने ऐसा न करके महंत के साथ महंत परमहंस दास के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया। जिसे किसी भी दशा में सही नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद-और रामजन्म भूमि को लेकर हमारा मतभेद अपनी जगह है, लेकिन किसी भी उलमा या संत का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मजलिस के प्रदेश अध्यक्ष मुफ्ती अहमद गौड़ ने कहा कि मजलिस संत परमहंस दास जी की मांग का समर्थन नहीं करती, लेकिन जिस अभद्र तरीके से उन्हें पुलिस ने उठाया उसकी निंदा जरूर करती है। संत समाज के आशीर्वाद व समर्थन से ही भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सत्ता तक पहुंची है और उनके साथ ही अपराधियों जैसा व्यवहार सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के मुखिया तो स्वयं एक मंदिर के महंत हैं। ऐसे में सरकारी निर्देशों पर पुलिस द्वारा संत के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जाना उचित नहीं है। इस मौके पर अफजाल कुरैशी, सऊद उस्मानी, कारी तसव्वुर, शुएब सिद्दीकी और मूसा चौधरी आदि मौजूद रहे।