ट्रिपल तलाक पर अध्यादेश को मंजूरी कतई मंजूर नहीं: दारुल उलूम
देवबंद (सहारनपुर)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट द्वारा तीन तलाक पर अध्यादेश को मंजूरी दिए जाने के मामले पर दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर मुसलमानों के धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप है।
तीन तलाक (इंस्टैंट ट्रिपल तलाक) पर अध्यादेश को मंजूरी दिए जाने को लेकर मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि दस्तूर-ए-हिंद (भारतीय संविधान) ने हमें मजहबी आजादी दी हुई हैं। तलाक व निकाह जैसे मसले खालिस धार्मिक मामले हैं। इनमें किसी भी हुकूमत की दखलंदाजी नाकाबिल-ए-कबूल है। उन्होंने कहा कि हम सरकार के इस कदम को संविधान के खिलाफ मानते हैं।
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि सरकार तीन तलाक पर जो अध्यादेश ला रही है एक तो वह अभी पूरी तरह से सामने नहीं आया है। इसमें सरकार की कोशिश है कि यह दोबारा से वापस न आए।
मदरसा दारुल उलूम अशरफिया के मोहतमिम मौलाना सालिम अशरफ कासमी ने कहा कि हिंदुस्तान गंगा जमुनी तहजीब का देश है। इसमें विभिन्न कम्यूनिटी के लोग रहते हैं और हमारे मुल्क का संविधान इस बात की इजाजत देता है कि हर मजहब के लोग धर्म के अनुसार अपना जीवन गुजार सकते हैं।
मदरसा जामिया शेखुल हिंद के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती असद कासमी ने कहा कि जब शुरू से तमाम मुसलमान और मुस्लिम तंजीमे यह कह रही हैं कि ट्रिपल तलाक को लेकर जो भी कानून बने उसमें उलमा से मशविरा लिया जाए। उसके बावजूद इसे जल्दबाजी में पारित क्यों किया जा रहा है। इससे साफ है कि सरकार की नीयत में खोट है।