...हालात आदमी को तमाशा बना देते हैं
सहारनपुर। हंसाते हैं कभी-कभी रुला देते हैं, हालात आदमी को तमाशा बना देते हैं। रचनाकार अनीता ने अपनी इन पंक्तियों के जरिए जीवन के संघर्ष को रखा। मौका था साहित्यिक संस्था समन्वय की ओर से उपाध्यक्ष विनोद भृंग के निवास पर आयोजित काव्य प्रवार गोष्ठी का, जिनमें अनेक कवियों और गीतकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
विनोद भृंग ने पढ़ा कि जीवन तो बहता पानी है, जान ले इसके पानी को, इक पल को भी भूल न जाना, संतों की इस वाणी को। सुनाकर वाहवाही लूटी। हरिराम पथिक ने दिख रहा बहता हुआ वातावरण, हो गए दूषित मनुज के अवतरण सुनाया। जय प्रकाश शर्मा ने जय प्रकाश की सदा रही है, जय प्रकाश की सदा रहेगी पढ़ा। गीतकार राजेंद्र राजन ने मुझे मुझसे मिलाने को, कोई अपना नहीं आता, हमारों लोग आते हैं कोई तुमसा नहीं आता सुनाकर तालियां बटोरी। डा. विजेंद्रपाल शमा्र ने इस जीवन के अंतिम क्षण में, कुछ विस्मृत चित्र उभर आए कविता सुनाई। कश्मीर सिंह ने पीढ़ी दर पीढ़ी मां ने सिखाया सिर्फ सहना, सुख में भी दुख में भी तटस्थ रहना। सुनाकर वाहवाही लूटी। डॉ. वीरेंद्र आजम ने मैं पत्रकार हूं, हर कॉलम में छपा समाचार हूं, नख से शिख तक संपूर्ण अखबार हूं सुनाया। चंद्रभान मैनवाल, मंजरी मनोज, सुमेधा नीरज, शिवराज राजू, प्रह्लाद आतिश, सुरेश सपन आदि ने अपनी रचनाएं पढ़ीं। गोष्ठी में डॉ. आरपी सारस्वत, सुशील नाज, इंद्रदेव भारती आदि मौजूद रहे।