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रेलवे स्टेशन पर अवैध वेंडरों को बचाने का खेल

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सहारनपुर। रेलवे स्टेशन पर कुछ ठेकेदारों ने अवैध वेंडरों को बचाने के लिए दूसरे जिलों के वेंडरों पर सहारनपुर में आकर खाद्य सामग्री बेचने का आरोप लगाया है। जबकि, हकीकत यह है कि सहारनपुर के अवैध ठेकेदार द्वारा ही वेंडरों से बिक्री कराई जा रही है।
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सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर वैध की बजाय अवैध ठेका छोड़ा गया है। अवैध वेंडरों का ही पूरे रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में कब्जा है। रेलवे द्वारा खाद्य पदार्थों के सिर्फ 22 स्टॉल ही अधिकृत किए हुए हैं। जबकि, स्टेशन पर और ट्रेनों में चार सौ से अधिक वेंडर खाद्य पदार्थों की बिक्री कर रहे हैं। अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि सिर्फ अधिकृत वेंडरों एवं स्टॉलों से यात्रियों की पूर्ति किया जाना संभव नहीं है। अनाधिकृत वेंडर न हों तो खाद्य सामग्री खरीदने के लिए आपाधापी मच जाएगी।
अधिकारियों की उदासीनता से न सिर्फ रेलवे को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है, बल्कि यात्रियों की सेहत के साथ भी जमकर खिलवाड़ हो रहा है। तीन माह पूर्व खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा की गई छापामारी में खाद्य सामग्री घटिया ही नहीं सेहत के लिए खतरनाक होने की बात साबित हो चुकी है। उस कार्रवाई पर कुछ ही दिन में पर्दा डाल दिया गया।
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इन अवैध वेंडरों और अवैध ठेकेदारों की साठगांठ इतनी अधिक है कि रेलवे के प्रशासनिक अधिकारियों की कार्रवाई से बचने के लिए दूसरे मंडल एवं जिलों के वेंडरों द्वारा सहारनपुर में आकर खाद्य पदार्थ बेचे जाने का आरोप लगाकर गुमराह करने का प्रयास किया जाने लगा है। दो दिन पहले ही कुछ लोगों द्वारा उत्तर रेलवे के सीएमआई को पत्र भेजकर शिकायत की गई कि सहारनपुर में नजीबाबाद, रुड़की, लुधियाना एवं अंबाला से अनाधिकृत वेंडर आकर खाद्य पदार्थ बेच रहे हैं।
इस मामले में रेलवे अधिकारियों का कहना है कि स्टेशन पर अवैध वेंडरों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। ट्रेनों में खाद्य पदार्थ बेचने वाले अवैध वेंडरों को भी पकड़ा जा रहा है। जिनमें सहारनपुर के भी अवैध वेंडर शामिल हैं। कुछ वेंडर कार्रवाई के डर से आउटर पर ही उतर कर भाग जाते हैं।
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