निकाय से निकलकर राजनीति में बनाई अलग पहचान
सहारनपुर। बेशक सहारनपुर की सियासत सूबे में पूरी दखल रखती है। मगर इसकी जड़ें नगर निकायों से ही जुड़ी हैं। देश की राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले काजी रशीद मसूद का परिवार पहले निकाय की राजनीति से जुड़ा रहा और उनके भतीजे पूर्व विधायक इमरान मसूद ने भी अपनी सियासत का आगाज सहारनपुर नगर पालिका से ही किया था। इतना ही नहीं, नगर पालिकाओं के चेयरमैन रहते हुए कई नेता विधानसभा तक भी पहुंचे हैं। वर्तमान में सहारनपुर की 11 निकायों में सैकड़ों प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे और सियासत भी उनकी ओर उम्मीद बांधे खड़ी है।
राजनीति में निकाय चुनाव का अपना अलग वजूद है और यही कारण है कि बड़े नेताओं की जड़े भी निकायों से जुड़ी मानी जाती रही है। सहारनपुर में भी कई ऐसे नेता रहे हैं जो यहां निकलकर सियासत में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब हुए। राजनीतिक रसूख वाला काजी परिवार तो खुद को कभी निकाय की राजनीति से अलग ही नहीं कर पाया। आजादी से पहले गंगोह के नोटिफाइड एरिया घोषित होने के बाद यहां सबसे पहले काजी हनीफ चेयरमैन बने। इसके बाद उनके छोटे भाई काजी मसूद लंबे समय तक निकाय के चेयरमैन रहे। गंगोह नगर पालिका में काजी रशीद मसूद के बड़े भाई और पूर्व विधायक इमरान मसूद के पिता काजी राशीद मसूद 1988 में चेयरमैन बने। राजनीति से जुड़े लोगों की मानें तो काजी रशीद मसूद को सियासी कद देने में उनकी बड़ी भूमिका बताई जाती है। गंगोह नगर पालिका में इसके बाद इनके बेटे नोमान मसूद निवर्तमान चेयरमैन हैं। ऐसे ही पूर्व विधायक इमरान मसूद की सियासी पारी का आगाज सहारनपुर नगर पालिका से हुआ। वर्ष 2001 में नगर पालिका चुनाव हारने के बाद दोबारा 2006 में भाग्य आजमाया और सहारनपुर नगर पालिका के चेयरमैन बने। इसी दौरान वर्ष 2007 में मुजफ्फराबाद से निर्दलीय विधायक भी बने और राजनीति में आगे बढ़ते रहे।
चेयरमैन के साथ विधायक का सफर
चेयरमैन बनने के बाद विधायक बनने वाले भी कई नेताओं की फेहरिस्त है। काजी मसूद गंगोह नगर पालिका चेयरमैन रहते हुए विधायक बने। देवबंद से विधायक बने मोहम्मद उस्मान भी वहां की नगर पालिका के चेयरमैन रहते हुए यह मुकाम हासिल किया। इमरान मसूद भी सहारनपुर नगर पालिका चेयरमैन रहते हुए विधानसभा पहुंचे। इसके अलावा देवबंद नगर पालिका के चेयरमैन माविया अली भी वर्ष 2015 के उपचुनाव में विधायक बने थे।