सहारनपुर। म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार के विरोध में जमीयत उलमा-ए-हिंद और अन्य संगठनों के जिम्मेदार लोगों ने जिलाधिकारी पीके पांडे को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नाम ज्ञापन सौंपा।
शुक्रवार को सौंपे गए ज्ञापन में जमीअत उलमा-ए-हिंद ने कहा कि म्यांमार में सदियों से आबाद रोहिंग्या मुसलमानों के साथ कुछ बौद्घ संगठनों द्वारा सोची समझी साजिश के तहत अत्याचार किया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति से मांग की कि वह भारत सरकार को म्यांमार के साथ राजनयिक संबंध समाप्त करने के निर्देश दें। उन्होंने वहां के शरणार्थियों को यूएनओ चार्टर के मुताबिक भारत में शरण देने की भी मांग की। मौलाना मोहम्मद फरीद मजाहिरी, एम शाहिद जुबैरी, कारी मोहम्मद नासिर जामयी, मौलाना मोहम्मद जुुनैद, मौलाना मोहम्मद साजिद हसन आदि रहे।
उधर, विभिन्न संगठनों के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने भी जिलाधिकारी को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौँपा। उन्होंने म्यांमार में मुसलमानों के साथ हो रहे अत्याचार की कड़ी निंदा करने की मांग की। शुक्रवार को डीएम को सौंपे ज्ञापन में उन्होंने कहा कि भारत सरकार म्यांमार में हो रही घटनाओं का विरोध दर्ज कराए। कारी सईद, हाजी तौसीफ सिददकी, कारी नासिर जामेई, मुफ्ती अताउर्रहमान कासमी, महजर उमर खान, मुफ्ती अहमद खुर्शीद, हाफिज सईद, कारी सालिम काशफी, मौलाना अतहर हक्कानी, मौलाना फजैल मजाहिरी, सैयद हस्सान, कारी मोहम्मद आरिफ मजाहिरी, डॉ. अब्दुल सत्तार, मोहम्मद इरफान, कारी शाहबुद्दीन कासमी, कारी अब्दुल समी, मौलाना अनवर नदवी, मौलाना अब्दुल मालिक मुगीसी, मुकीम अहमद, कारी शब्बीर अहमद, हैदर रउफ सिद्दीकी, डॉ. शफीउल्लाह, मोहम्मद राशिद सिद्दीकी, मौलाना रियाजुल हसन नदवी आदि रहे।