15 साल से अधिक पुरानी स्कूल बसें होंगी सीज
सहारनपुर। जिले में 15 साल से पुरानी स्कूल बसें सीज होंगी। प्रशासन के इस फरमान से स्कूल संचालकों और बस मालिकों में बेचैनी है। डीआईओएस ने तमाम स्कूल संचालकों को नोटिस जारी कर बसों के लिए निर्धारित मानकों को पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।
जनपद में चल रही ज्यादातर स्कूल बसें खटारा हैं, जो 20 से 25 साल तक पुुरानी हैं। बस मालिकों ने रंग-रोगन नया कराकर बसों की सूरत बदली हुई है। कई बार खटारा बसें बच्चों की जिंदगी के लिए मुसीबत बन चुकी हैं। मगर अब ऐसा नहीं होग। नए आदेश के अनुसार स्कूली बच्चों को लाने और ले जाने वाली बसें पूरी तरह मानकों के अनुरूप होनी चाहिएं। मानक पूरा न करने वाली बसों को सीज करने के आदेश हुए हैं। डीआईओएस आरके तिवारी ने इस संबंध में सभी स्कूल संचालकों को नोटिस जारी करते हुए मानकों का पालन कराने को कहा है।
स्कूल बसों के लिए यह हैं मानक
-बस परिवहन विभाग से जारी फिटनेस प्रमाण पत्र होना चाहिए।
-वाहन स्कूल के नाम से पंजीकृत होना चाहिए।
-निजी ऑपरेटर अपने वाहन को स्कूल मानक के अनुसार पंजीकृत कराकर स्कूल बस के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। मगर कांट्रेक्ट कैरेज का प्रमाण पत्र अनिवार्य रहेगा।
-बस के आगे-पीछे मोटे अक्षरों में स्कूल बस लिखा होना जरूरी है।
-स्कूल बस किराये की कोई सवारी नहीं ढोएगी।
-स्कूल बस पर स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर लिखा होना जरूरी।
-बस 15 साल से पुरानी न हो।
-प्रत्येक बस के भीतर बच्चों की सूची नाम और पता सहित होनी चाहिए।
-स्कूल बस का रंग गोल्डन येलो विद ब्राउन और ब्लू लाइन होना चाहिए।
-बस के भीतर अग्निशमन यंत्र होना चाहिए।
-बस के भीतर फर्स्ट एड बॉक्स होना चाहिए।
-प्रेशर हॉर्न और टोनल साउंड सिस्टम नहीं होगा।
-सीट क्षमता से अधिक बच्चों को नहीं ले जाएंगे।
-सीट और खिड़की के शीशे ऐसे हों कि बच्चा गर्दन बाहर न निकाल सके।