सहारनपुर। जनपद में करीब 120 बीघा गन्ने की फसल रेडरॉट रोग की चपेट में हैं। यह रोग गन्ना प्रजाति को- 0238 में ही दिखाई दे रहा है। गन्ना विभाग इस पर नियंत्रण के लिए किसानों को टिप्स दे रहा है।
रेडरॉट रोग से ग्रसित होने के चलते गन्ना विभाग ने को-0238 प्रजाति की बजाए अन्य प्रजातियों की बुवाई पर जोर दिया है। प्रजाति बदलाव के तमाम प्रयासों के बावजूद जनपद के किसान अभी भी को-0238 प्रजाति का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह इस प्रजाति की बेहतर उत्पादकता है। गन्ना विभाग और चीनी मिल द्वारा कराए गए एक सर्वे में देवबंद क्षेत्र में 120 बीघा से अधिक गन्ने की फसल रेडरॉट रोग से ग्रसित पाई गई।
- रेडरॉट रोग की पहचान
रेडरॉट एक फफूंदी जनित रोग है। इस रोग की शुरूआत में गन्ने की पत्तियों के निचले भाग के ऊपर की तरफ मध्य सिरे पर लाल रंग के छब्बे बनते हैं। इस बीमारी के लक्षण जून में दिखने शुरू हो जाते हैं। प्रभावित गन्ने को सीधा काटने पर अंदर का रंग लाल होने के साथ ही उस पर सफेद धब्बे भी दिखाई देते हैं। गन्ने को सूंघने पर सिरके या अल्कोहल जैसी गंध आती है।
- ऐसे करें रोग पर नियंत्रण
जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि किसानों को रेडरॉट रोग को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए। प्रभावित गन्ने के पौधों को जड़ सहित खेत से निकालकर नष्ट कर दें। जिस स्थान से पौधों को उखाड़ा गया है वहां 10 से 20 ग्राम ब्लिचिंग पाउडर डालकर ढंक दें। या 0.2 प्रतिशत थायोफेनेट मेथिल 70 डब्लूपी या एजॉक्सीस्ट्रोबिन 18.2 एवं डाईफेनोकोनाजोल 11.4 का घोल बनाकर ड्रेचिंग करें। बुवाई से पहले गन्ने के कटे हुए टुकडों को कार्बेडाजिम या थायोफेनेट मेथिल से शोधित करें। मृदा में चार किलो प्रति एकड़ की दर से ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करना भी मुफीद रहता है।
- इन गांवों में चिह्नित हुआ रेडरॉट का प्रकोप
गन्ना विभाग के अनुसार देवबंद क्षेत्र के कई गांवों में गन्ने की फसल में रेडरॉट का प्रकोप चिन्हित हुआ है। इनमें खोजा नगला, दूधली, चिराऊं, मोहिददीनपुर, नसरूल्लापुर, सुनहैटी, मिरगपुर, दुगचाड़ी, रामूपुर, बढेड़ी कलां, बचीटी, शिमलाना, छिमाऊं, जखवाला,धूमगढ, भनेडा खास आदि गांव शामिल हैं। इनमें एक या दो किसानों के गन्ने की फसल रेडरॉट से प्रभावित दिखाई दी।