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हाईकोर्ट ने हटाई राजपूत समाज के तीन लोगों से रासुका

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सहारनपुर। शब्बीरपुर कांड के मामले में राजपूत समाज के तीन लोगों पर लगाई गई रासुका को हाईकोर्ट ने हटा दिया है। तीनों लोगों पर रासुका हटाने को लेकर काफी समय से सुनवाई चल रही थी। सहारनपुर के गांव शब्बीरपुर में 5 मई 2017 को हुई हिंसा के बाद 9 मई को सहारनपुर में भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने दलित समाज के युवाओं के साथ मिलकर जमकर बवाल मचाया था। अभी यह बवाल थमा भी नहीं था कि 23 मई को एक बार फिर सहारनपुर में पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती की सभा के बाद लौट रहे लोगों पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया था। 5 मई को हुई हिंसा और फिर 23 मई को हुए हमले में दो लोगों की मौत हो गई थी। इस हिंसा में राजपूत समाज के 3 लोगों राजू, सुधीर और सोनू पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई, जबकि शब्बीरपुर कांड और सहारनपुर हिंसा के मामले में शब्बीरपुर निवासी सोनू, ग्राम प्रधान शिवकुमार और भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर उर्फ रावण के खिलाफ रासुका लगाई गई थी। रावण पर रासुका हटाने को लेकर कई बार प्रयास किया गया जबकि राजपूत समाज के तीन लोगों पर लगाई गई रासुका को हटाने के लिए भी पूरा प्रयास चल रहा था। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई और मंगलवार को राजपूत समाज के तीनों आरोपियों अंबेहटा चांद निवासी राजू, सुधीर और सोनू से रासुका हटाए जाने के निर्देश दिए गए। राजपूत समाज के तीनों आरोपियों से हाईकोर्ट द्वारा रासुका हटाई जाने के बाद लोगों ने खुशी जताई है। राजपूत समाज के लोगों को कहना है देर से ही सही आरोपियों को न्याय मिला है। इस मामले में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विद्यासागर मिश्र का कहना है कि हाईकोर्ट के निर्णय का वह स्वागत करेंगे, लेकिन अभी तक उनके पास हाई कोर्ट के आदेश प्राप्त नहीं हो सके हैं।
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