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धार्मिक समस्याओं का समाधान निकालने के लिए होता है फतवा: रिसायत

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उत्तराखंड जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष बोले: उत्तराखंड हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद उत्तराखंड के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती रियासत अली कासमी ने कहा कि फतवा दीन व दुनिया में आने वाली धार्मिक समस्याओं का समाधान निकालता है और लोग उस पर अमल भी करते हैं। इसलिए उत्तराखंड हाईकोर्ट फतवों पर बैन के निर्णय पर पुनर्विचार करे।
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रविवार को देवबंद पहुंचे मौलाना मुफ्ती रियासत अली कासमी ने कहा कि भारतीय संविधान से मुसलमानों को यह अधिकार प्राप्त है कि वह इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार अपनी जिंदगी गुजारें। मुस्लिम समाज का मार्गदर्शन करने वाले फतवों को उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा बैन करना गलत है। क्योंकि पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि फतवा धार्मिक मशविरा है इसलिए इस पर बैन नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि फतवा मांगने वालों के लिए होता है। अगर कोई व्यक्ति शरीयत के मुताबिक किसी काम को करना चाहता है और उसे इसके बारे में ज्ञान नहीं है तो वह मुफ्तियों से इसके संबंध में सवाल पूछता है और मुफ्ती कुरआन और हदीस की रोशनी में उसका सही जवाब देते हैं। फतवा लेने वाला उस पर अमल करता है या नहीं यह उस पर ही निर्भर करता है। इस मामले में मुफ्ती किसी भी प्रकार की जोर जबरदस्ती नहीं कर सकते। मौलाना रियासत ने कहा कि 1400 सालों से 99 प्रतिशत मुसलमान कुरआन व हदीस की रोशनी में धार्मिक समस्याओं का हल निकलता चला आ रहा है। इसलिए वह उत्तराखंड हाईकोर्ट में फतवों की रक्षा के लिए अपना पक्ष रखेंगे।
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