देवबंद (सहारनपुर)। मुकद्दस रमजान के महीने में हलाल की कमाई को जायज जगहों पर खर्च करना भी रोजे का एक अहम हिस्सा है। मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है कि हराम की कमाई से रोजे के लिए सहरी करना और उसी कमाई से इफ्तार करना जायज नहीं, अल्लाह को ऐसे रोजे की जरूरत नहीं है।
मुकद्दस रमजान का महीना कितनी अहमियत वाला है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि रमजान माह में तमाम बुराइयों को त्यागने, दूसरों को तकलीफ न पहुंचाने, हलाल की कमाई का इस्तेमाल करने और हराम आमदनी को छोड़कर हलाल रिज्क कमाने का हुक्म शरीयत में दिया गया है। शरीयत के हुक्म पर रोशनी डालते हुए मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी ने कहा कि रोजे का मकसद खाने पीने की चीजों को छोड़ना नहीं बल्कि हर गलत काम व गुनाहों की चीजों को त्यागना है। झूठ न बोलना, गिबत न करना, दूसरों को तकलीफ पहुंचाने वाली बातों को न करना, हराम की कमाई को छोड़कर जायज तरीके से कमाई करना और उस कमाई को जायज जगहों पर खर्च करना रोजे का एक अहम हिस्सा है। मुफ्ती तारिक ने कहा कि अगर कोई शख्स रोजा रखकर हराम की कमाई से सहरी व इफ्तार करता है तो अल्लाह ताआला को ऐसे रोजे की जरूरत नहीं है। इसलिए हुजूर ने फरमाया हलाल माल से रोजा रखो और उसी से इफ्तार करो। उन्होंने कहा कि रमजान में मुसलमानों को पांचों वक्त की नमाज की पाबंदी करनी चाहिए और नफली इबादतों में वक्त लगाना चाहिए। इसके अलावा जकात अदा करने के साथ ही ज्यादा से ज्यादा नफली सदका देना भी सवाब का काम है।