गांवों के हैंडपंप उगल रहे जहरीला पानी, फैल रहा कैंसर
सहारनपुर। राष्ट्रीय शुद्ध पेयजल मिशन के तहत लगाए गए हैंडपंप जीवन के लिए खतरा बन गए। कई ग्रामीण क्षेत्रों में यह हैंडपंप पीला पानी दे रहे हैं। इन गांव के कई लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है। वर्तमान में ग्रामीण कैंसर से पीड़ित हैं। उधर, जल निगम पीले पानी को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं मानता है। वहीं, चिकित्सक पीले पानी को जीवन के लिए खतरा बताते हैं।
जनपद में राष्ट्रीय शुद्ध पेयजल मिशन के तहत अभी तक 36 हजार 464 हैंडपंप लाए जा चुके हैं। भारी संख्या में हैंडपंप पीला पानी दे रहे हैं। ब्लॉक देवबंद, रामपुर मनिहारान और नानौता क्षेत्र में हिंडन किनारे बसे गांवों में समस्या अधिक है। शहीद जयद्रथ के गांव भगवानपुर निवासी बाला पत्नी विजेंद्र गले के कैंसर, भागमल पुत्र पूरण लीवर कैंसर, बिरजू गले के कैंसर और मंगू पुत्र रामचंद भी कैंसर से पीड़ित है। ग्रामीण बताते हैं कि भगवानपुर में 15 लोगों की अभी तक कैंसर से मौत हो चुकी है। गांव में लगे हैंडपंपों से पीला पानी निकल रहा है, जो ग्रामीणों की जिंदगी के लिए खतरा बना है। बड़गांव क्षेत्र के ग्राम सांवतखेड़ी, टपरी, मिर्जापुर, कुतबामाजरा, चंदपुर, महेशपुर, शबीरपुर, शिमलाना, चिराऊ, बहेड़ा, सिसौनी, नन्हेड़ा, बिहारीगढ़, छुटमलपुर और ब्लॉक मुजफराबाद के ग्रामीण क्षेत्रों में लगे हैंडपंप भी दूषित जल दे रहे हैं। समस्या को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी जांच कर चुकी हैं, लेकिन हानिकारक पानी से बचाव के लिए प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया।
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--। क्या कहते हैं अधिकारी
सहारनपुर। जल निगम के सहायक अभियंता सुदेेश कुमार कहते हैं कि हैंडपंप से निकलने वाले पीले पानी की जांच कराई जा चुकी है। इस पानी में आयरन की मात्रा अधिक है, लेकिन सेहत के लिए पानी नुकसानदायक नहीं है।
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लीवर की बीमारी का ज्यादा खतरा: चिकित्सक
सहारनपुर। शहर के वरिष्ठ फिजीशियन डा. संजीव मिगलानी, डा. कलीम अहमद और डा. बलजीत मनचंदा कहना है कि पानी में आयरन की मात्रा अधिक होने से गंभीर बीमारी होती है। अधिक समय तक ऐसे पानी का सेवन करने से व्यक्ति का लीवर पूरी तरह खराब हो जाएगा और वह सिरोसिस ऑफ लीवर बीमारी की चपेट में आ जाएगा। कैंसर होने के साथ आंतो में सूजन और किडनी फेल होने का भी खतरा बना रहता है।
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--। नहीं कराई गई रिबोरिंग
सहारनपुर। आयरन की अधिक मात्रा वाले जल से लोग बीमार रहे हैं, लेकिन इन हैंडपंपों से शुद्ध जल उपलब्ध कराने के लिए आज तक रिबोरिंग नहीं कराई गई, जबकि कई वर्षों से ग्रामीण रिबोरिंग की मांग करते चले आ रहे हैं। विभाग ने 60 फिट की गहराई पर बोर कर हैंडपंप लगाए हैं और जहां ग्रामीणों ने निजी संसाधनों से 150 फिट पर हैंडपंप की बोरिंग कराई है, वहां शुद्ध जल मिल रहा है।