सहारनपुर। आम के बागों में थ्रिप्स कीट का प्रकोप दिखाई देना शुरू हो गया है। इस कीट का वयस्क और लार्वा नई पत्तियों और कोमल टहनियों का रस चूसकर खराब कर देता है। जिसके चलते प्रभावित बाग में आम के उत्पादन पर इसका असर पड़ता है। आम की चौसा और रामकेला प्रजातियों पर इस कीट का प्रकोप अधिक दिखाई दे रहा है।
आम के बागों में लगने वाला थ्रिप्स कीट से प्रभावित पत्तियां रस चूसने और खुरचने के कारण मुड जाती हैं। जो बाद में सूखकर नीचे गिर जाती हैं। कीट से प्रभावित छोटे फलों में पहले सिल्की धब्बे बनते हैं, जो बाद में भूरे रंग में बदल जाते हैं। इस कीट एक मिलीमीटर लंबा और काला या गहरे भूरे रंग का होता है। यह कीट छाया को अधिक पसंद करता है। थ्रिप्स कीट के लिए सबसे अनुकूल तापमान 26 डिग्री सेल्सियस होता है। प्रभावित बागों में जहां फलों की गुणवत्ता को खराब करता है वहीं उत्पादन पर भी इसका काफी असर होता है। कृषि विज्ञान केंद्र के फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि इस कीट पर नियंत्रण पाने के लिए स्पेनोसेड या टोकन डेनूटेफुरान, या स्टालकर क्रिप्रोनिल एससी की 500 ग्राम मात्रा को 2000 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि आम के बौर को बिमारी से बचाने के लिए अवतार हैक्सकोनाजॉल जिनेब की 3 किलोग्राम मात्रा या इंडोकार डिनोकैप 48 ईसी की 2 लीटर मात्रा को 2000 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना फायदेमंद रहता है।