फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मदीना कालोनी और थीतकी गांव में मोहर्रम पर निकाला गया मातमी जुलूस

विज्ञापन
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। थीतकी गांव और मदीना कालोनी में शिया समुदाय के लोगों ने करबला में हुए जुल्म को याद कर मातमी जुलूस निकाला। इसके बाद मजलिस का आयोजन भी किया गया।
विज्ञापन

बृहस्पतिवार को थीतकी गांव में बरपा हुई मजलिस में ईरान से आए शिया धर्मगुरु मौलाना मोहम्मद सईद ने कहा कि करबला की घटना कोई जंग नहीं थी। बल्कि कुरआन को बचाने की मुहिम थी जिसके लिए नवासा-ए-रसूल ने करबला की जमीन पर अजीम कुरबानी दी। इसके बाद छोटा इमामबाड़ा से नोहाख्वानी व सीनाजनी करते हुए या हुसैन, या हुसैन की सदाओं के बीच सोगवारों ने करबला तक मातमी जुलूस निकाला। नोहाख्वानी गजनफर अली ने की। जबकि औसाफ मियां ने मरसिया पढ़ा। इस मौके पर पूर्व राज्यमंत्री सैय्यद ईसा रजा, बीजेपी नेता मो. जुनैद, सैय्यद मेहंदी हसन, जामीन हुसैन, तसद्दुक हुसैनी, मिसम रजा, शमा रजा, शब्बीर हुसैन, मुतवल्ली अब्बास, नवेद, अमन आदि मौजूद रहे। वहीं, मदीना कालोनी में भी मजलिस का आयोजन हुआ। जिसमें मौलाना असद अब्बास जौनपुरी ने कहा कि सौदा इब्ने केस ने सरकार से कस्सास का मुतालबा किया। बीबी यानि जनाबे फातमा जैहरा ने चाबुक लाकर सौदा इब्ने कैस के हवाले किया और बेसाख्ता रोने लगीं, बिलाल जब चाबुक लेके आया तो देखा तमाम लोग बेसाख्ता रो रहे हैं। उन्होंने कहा कि तब हुजूर ने चाबुक लेकर आवाज दिया ऐ सौदा इब्ने कैस आजा और अपना कस्सास ले ले। सौदा आपके करीब आया और फरमाया सरकार जब मेरी पीठ पर चाबुक लगी थी। तो मेरे जिस्म पर लिबास नहीं था। लिहाजा आप भी पैरहन उतार लें। जैसे ही सरापा रहमत ने पैरहन उतारा तो सौदा इब्ने केस तड़पकर मोहे नुबूवत का बोसा लिया और रो-रोकर फरमाया मेरे मां बाप आप पर फिदा हैं। मेरा मकसद कस्सास नहीं था। मोहे नुबूवत का बोसा लेना था। इसके उपरांत उन्होंने सीनाजनी की। इस मौके पर शब्बीर अली, मुनव्वर अली, इकबाल हुसैन, बरकत अली आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें