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प्रधानों के चक्कर में शराब माफिया नहीं दिखे

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सहारनपुर। शराब बनाने में प्रयुक्त होने वाले आइसोप्रोपिल एल्कोहल पुंडेन निवासी हरदेव और उसके साथियों ने अर्जुन डाडली (हरिद्वार) से खरीदा था, जिससे जहरीला जाम तैयार किया था, लेकिन अधिकारियों ने जहरीली शराब के कारण हुई मौतों के बाद प्रधानों और अन्य लोगों की बात पर ज्यादा भरोसा कर लिया था। जिस वजह से मौत के सौदागरों से पुलिस प्रशासन की नजरें बची रहीं। अब आरोपियों की गिरफ्तारी होने से पूरी कहानी खुल गई है।
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सहारनपुर और उत्तराखंड की पुलिस द्वारा संयुक्त कार्रवाई के बाद मंगलवार को आरोपी अर्जुन निवासी डाडली भी गिरफ्तार कर लिया गया, जिसने रुड़की के एक व्यापारी के यहां से छह ड्रम आइसोप्रोपिल एल्कोहल खरीदा था। उसमें से तीन ड्रम अर्जुन ने हरदेव और गुरु साहब उर्फ लाडी निवासी चुन्हेटी शेख को बेच दिए थे, जबकि दो ड्रम टिंकू उर्फ पहल सिंह निवासी नागल को बेचा था। लाडी और हरदेव ने 50 लीटर आईसोप्रोपिल एल्कोहल से शराब बनाई थी, जिसमें से 35 बोतल शराब बालुपुर के सोनू को बेची गई थी, बाकी शराब हरदेव और लाडी ने गागलहेड़ी और नागल थाना क्षेत्रों में बेच दी थी। इसी शराब को बालुपुर के सोनू ने हरिद्वार जनपद में अपने आसपास के गांवों में बेचा था। इस खुलासे से स्पष्ट है कि जहरीली शराब में प्रयुक्त किया गया केमिकल हरिद्वार जनपद के अर्जुन ने दिया था, लेकिन शराब बनाकर बेचने वाले सहारनपुर जनपद के ही हैं।
उधर, पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने 9 फरवरी को जब गागलहेड़ी और नागल थाने पर बैठकें की, तो इन गांवों के प्रधानों को भी बुलाया गया था। तब गांव प्रधानों के साथ ही अन्य लोगों ने भी अधिकारियों से कहा था कि उनके गांव में शराब नहीं बनाई जा रही है। अधिकारियों ने ग्राम प्रधानों और अन्य लोगों के बयान भी लिए थे।
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संख्या पहुंची 83, पर प्रशासन की सूची में 36
सहारनपुर। जिले में जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या 83 हो गई है। मंगलवार को देवबंद क्षेत्र के गांव शिवपुर निवासी धनपाल की मौत हो गई, जबकि सोमवार तक 82 लोगों की मौत हो चुकी थी। जिला प्रशासन की तरफ से जहरीली शराब से मरने वाले 36 लोगों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये आर्थिक सहायता के चेक सौंप दिए गए हैं, जबकि जहरीली शराब पीने से बीमार हुए 10 लोगों को 50-50 हजार रुपये सहायता राशि प्रदान की गई है। वहीं, मेरठ मेडिकल में भर्ती लोगों में कितने लोगों की मौत हुई, इसका आंकड़ा भी जिला प्रशासन आने से इंकार कर रहा है। अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) एसके दूबे का कहना है कि अभी मेरठ से रिपोर्ट नहीं आई है कि वहां भर्ती सहारनपुर के कितने लोगों की मौत जहरीली शराब पीने की वजह से हुई।
एसआईटी के साथ रहेंगे स्टेनो
सहारनपुर। जहरीली शराब कांड की जांच करने के लिए एसआईटी को उन सभी गांवों में जाना है, जहां जहरीली शराब के कारण लोगों की मौत हुई। जिला प्रशासन की सूची के मुताबिक ही ऐसे करीब 16 गांव हैं। मामले की जांच करने में एसआईटी को कई दिन लग सकते हैं। गांवों में जांच के दौरान लोगों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे, जिसके चलते आशुलिपिकों (स्टेनो) की ड्यूटी भी एसआईटी के साथ लगाई जाएगी। जिले से सात स्टेनो इस कार्य पर लगाए जाने हैं।
खतरनाक है आइसोप्रोपिल एल्कोहल
आइसोप्रोपिल एल्कोहल खतरनाक होता है। यह तेज गंध के साथ रंगहीन, ज्वलनशील रासायनिक यौगिक है। यह एक माध्यमिक शराब का सबसे सरल उदाहरण है। इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के औद्योगिक और घरेलू रसायनों के निर्माण में किया जाता है और एंटीसेप्टिक्स , कीटाणुनाशक और डिटर्जेंट जैसे रसायनों में भी किया जाता है।
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