सहारनपुर। लाखों लोगों की आस्था से जुड़ी पांवधोई नदी अपने अस्तित्व को खो रही हैं। नदी को बचाने के लिए करीब एक दशक से मुहिम चल रही है, मगर गंदगी ने उसकी सूरत को बिगाड़ दिया है। बाकायदा नगर निगम के पास नदी की सफाई के लिए बजट भी रहता है। इतना बड़ा प्रशासनिक अमला और समिति में विशेषज्ञों के होने के बावजूद पांवधोई नदी अब पूरी तरह नाला बन चुकी है। यह स्थिति तब है कि जब नदी की सफाई के लिए होने वाली बैठकों में हजारों रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
शहर के बीच से होकर गुजरने वाली पांवधोई नदी का एतिहासिक महत्व है। पिछले करीब दो दशक में नदी की जो हालत हुई है उसने नदी को पुनर्जीवित करने की सोच लोगों के दिमाग में पैदा की। यही वजह रही कि पूर्व डीएम आलोक कुमार ने नदी को साफ और अविरल बनाने का बीड़ा उठाया। उन्होंने नदी की सफाई के लिए प्रशासनिक मशीनरी को लगाने के साथ ही शहर के प्रबुद्घजनों और पर्यावरण से जुड़े लोगों को अपने साथ जोड़ा। पुल खुमरान से किशनपुरा तक नदी के दोनों ओर दीवार और उसके ऊपर जाली लगवाई गई, जिससे कोई व्यक्ति नदी में कचरा न डाल सके। इसमें काफी हद तक सफलता भी मिली। मगर उनके जाने के बाद नदी फिर से अनाथ हो गई। अब पिछले करीब एक दशक से नदी की हालत लगातार खराब हो रही है। वर्तमान में धोबी घाट पर नदी में कीचड़ भरा हुआ है, जिसकी वजह से इसका अस्तित्व खत्म सा हो गया है। जगह-जगह से नदी के दोनों ओर लगाई गई जाली भी लोगों ने तोड़ डाली है। पांवधोई की सफाई को लेकर प्रशासन पिछले करीब दो महीने में कई बार बैठक कर चुका है, मगर धरातल पर कोई काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है।
नदी को भूल गए पांवधोई बचाओ समिति के पदाधिकारी
पांवधोई नदी को बचाने के लिए एक समिति का गठन किया गया है। समिति में अनेक पर्यावरणविद, शिक्षक, समाजसेवी, व्यापारी, उद्यमी आदि लोग जुड़े हुए हैं। मगर अफसोस नदी को बचाने के लिए बनी इस समिति के सदस्य भी कहीं गुम हो गए हैं। कहना गलत नहीं होगा कि समिति के पदाधिकारी केवल मीडिया के कैमरों में दर्ज होने के लिए सामने आते हैं। नदी को स्वच्छ बनाने के लिए जन जागरूकता या जन सहभागिता के लिए आज तक एक कदम समिति की ओर से नहीं उठाया गया है।
नदी में डाला जा रहा कचरा
पाबंदी के बावजूद नगरवासी नदी को गंदा बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। नदी के आसपास के अनेक दुकानदार, फल और सब्जी विक्रेता रात में काम निपटाकर सारा कचरा नदी में डाल रहे हैं। इतना ही नहीं, पुल खुमरान के पास नगर निगम द्वारा कचरा डालने के लिए प्वाइंट बनाया गया है। यह प्वाइंट ठीक नदी के किनाने पर है। यहां डाले जाने वाले कचरे का बड़ा हिस्सा नदी में गिरता है, जिसकी वजह से भी नदी गंदी हो रही है।
नदी में डाले जा रहे सीवर और नाले
शहर भर से निकलने वाले तमाम नालों का पानी पांवधोई नदी में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा अनेक जगहों पर सीवर और सेफ्टी टैंक की गंदगी भी सीधे नदी में छोड़ी गई है। नगर निगम कई साल से सीवर और नालों को नदी में डालने से रोकने की बात कहता आ रहा है। मगर तैयारी कुछ नहीं है।
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समिति निकालती है जागरूकता रैलियां: शर्मा
पांवधोई बचाओ समिति के संयुक्त सचिव एवं पर्यावरणविद् डॉ. पीके शर्मा ने बताया कि समिति के हाथ में कोई ज्यादा पावर नहीं है। नगर निगम और प्रशासन जहां कहता है समिति के पदाधिकारी खड़े मिलते हैं। इसके अलावा समिति जन जागरूकता के लिए साल में दो बार रैलियां निकालती है।
पांवधोई नदी की सफाई को लेकर नगर निगम की अभी कई प्लानिंग है। नदी की सफाई को लेकर कुछ दिन पहले मीटिंग हुई थी, जिसमें अधिकारियों का कहना था कि बरसात में नदी अपने आप साफ हो जाएगी। ऐसे में कुछ करने की जरूरत नहीं है। बाकी उच्चाधिकारी जिस तरह के आदेश देंगे उनका अनुपालन किया जाएगा।
- डॉ. एके त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी।
पांवधोई की सफाई की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। मई के पहले सप्ताह में ही हम सबसे पहले नदी के दोनों ओर हुआ अतिक्रमण हटवाएंगे। उसके बाद नदी के उदगम स्थल से नदी की सफाई के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। नदी की सफाई में किसी भी स्तर की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- पीके पांडेय, डीएम।