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विख्यात संत बाबा हरिदास के दर्शन कर मन्नत मांगी

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गंगोह (सहारनपुर)। विख्यात संत बाबा हरिदास मंदिर पर लगने वाला परंपरागत मेला शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति के साथ आरंभ हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन कर मन्नत मांगी। भंडारे भी आयोजित किए गए।
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मेले का शुभारंभ प्रभात फेरी उपरांत धर्म ध्वजा प्रतिष्ठापित कर किया गया। श्री अस्थल मंदिर से प्रभात फेरी के साथ धर्म ध्वजा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई बाबा हरिदास मंदिर लाकर विधिविधान के साथ प्रतिष्ठापित की गई। बाबा के दर्शनों को सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं कतारें लग गई थी। जो देर शाम तक लगी रही। बाबा के दर्शनों के साथ ही श्रद्धालुओं ने उनकी पादुकाओं का जलाभिषेक किया। मंदिर के बराबर में स्थित बाबा के धूने पर भी श्रद्धालुओं ने माथा टेका। इसके उपरांत श्रद्धालुओं ने मेले में खेल तमाशों और चाट पकौड़ों का आनंद उठाया। बच्चों ने भी खेल-खिलौनों की खरीदारी की। किंवदती है कि बाबा के चरणों में बैठकर सच्चे मन से मांगी गई मुराद बहुत जल्द पूरी हो जाती है। उधर, गांव मोहनपुरा स्थित बाबा की समाधि स्थल पर भी श्रद्धालुओं ने जाकर माथा टेका।
सेवाभाव और त्याग की प्रतिमूर्ति थे बाबा हरिदास
गंगोह। विख्यात संत बाबा हरिदास सेवाभाव और त्याग की प्रतिमूर्ति थे। उनके और हजरत कुतबे आलम के बीच गहरा दोस्ताना रिश्ता था। दोनों के बीच इतना प्यार रहा कि हजरत कुतबे आलम शेख अब्दुल्ल कुद्दुस के गंगोह आगमन पर उन्होंने अतिथि सत्कार धर्म का निर्वाह करते हुए सराय पट्टी स्थित अपनी कुटिया हजरत के लिए खाली कर दी थी। इसमें हजरत कुतबे आलम ने लंबे अरसे तक वास करते हुए अल्लाह की बंदगी की। वर्तमान में भी दरगाह के एक कोने में बाबा हरिदास की कुटिया स्थित है। जिसे हुजरा कहा जाता है। उर्स के मौके पर बाकायदा संत बाबा हरिदास के पास निमंत्रण भेजने की परंपरा आज तक जारी है।
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