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अयोध्या विवाद पर कोर्ट के बाहर कोई फैसला मंजूर नहीं: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

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अयोध्या विवाद पर कोर्ट के बाहर का कोई भी फैसला मंजूर नहीं
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देवबंद(सहारनपुर)। बाबरी मस्जिद-रामजन्म भूमि विवाद पर कोर्ट के बाहर मध्यस्थता का प्रयास कर रहे ऑर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर को लेटर भेजकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ये साफ कर दिया कि इस दिशा में की जा रही उनकी कोशिशें एक तरफा है इसलिए बोर्ड सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही मानेगा। इसके साथ ही बोर्ड ने श्रीश्री रविशंकर को यह भी कहा कि वो दहशतगर्दों और समाज विरोधी ताकतों को उकसाने का काम कर रहे हैं।
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बृहस्पतिवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने ऑट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर को भेजे दो पेज के लेटर में कहा कि हमें उम्मीद थी कि आप कोई ऐसा फॉर्मूला पेश करेंगे जो इंसाफ और कानून के मुताबिक होगा और उसकी बुनियाद पर बाबरी मस्जिद के पक्षकारों को सुलह का प्रस्ताव देंगे। अगर आप ऐसा करते तो मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड आपकी पहल का स्वागत करता। लेकिन हमें अफसोस है कि आपने ऐसा न करके सिर्फ मुसलमानों से अपने हक से पीछे हटने की मांग का रास्ता अपनाया। जो जाहिर है कि हमें न पहले कबूल था और न आज कबूल है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि हमारी दलीलें हद से ज्यादा मजबूत होने के बावजूद अदालत का फैसला कुछ भी हो सकता है। मगर इसके बाद भी हम साफ कहते हैं कि अदालत के आखिरी फैसले को मानेंगे और हमारा ख्याल है कि हमारे विरोधी पक्ष को भी यही रुख इख्तियार करना चाहिए। मौलाना वली रहमानी ने कहा कि अगर वो (दूसरे पक्षकार) मुल्क के कानून को मानते हैं और आप जैसे उन तमाम लोगों को जो अपना परिचय एक अमन पसंद आध्यात्मिक गुरु की हैसियत से कराते हैं तो किसी अच्छे फॉर्मूले की गैर मौजूदगी में दूसरे पक्ष को समझाना चाहिए कि वो भी अदालत के फैसले को माने। साथ ही कहा कि हमारे लिए ज्यादा दुख और अफसोस की बात यह है कि आप भी उन्हीं की बोली बोल रहे हैं और मुल्क में भयानक कत्लेआम का जिक्र करके दहशतगर्द और समाज विरोधी ताकतों को उकसाने का काम कर रहे हैं। इसलिए आपसे यह गुजारिश करते हैं कि आप हिंदू भाईयों से और पूरे देश के लोगों से यह अपील करें कि वो अदालत के फैसले को कबूल कर लें। क्योंकि एक ऐसे देश में जहां पर अलग अलग धर्मों के मानने वाले रहते हों, ऐसे में बाबरी मस्जिद की मिल्कियत और बंटवारे के मामले में अदालत के फैसले को मानने से ही अमन कायम हो सकता है। इसलिए इस पर गंभीरता करें। मौलाना वली रहमानी ने लेटर में यह भी कहा कि हमारे देश में एक तबका ऐसा है जो दहशतगर्दी और हैवानियत की तमाम हदों को पार कर रहा है और देश में नफरत और खौफ का माहौल बना रहा है। अच्छा होता कि आप जुल्म और जालिमों के खिलाफ आवाज बुलंद करते और गरीब व मजलूमों के मद्दगार बनकर देश और कौम के सामने आते। ऐसी ईमानदाराना कोशिश से मुल्क में भाईचारा और अमन कायम करने में वाकई मदद मिलती।
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