सरसों और गेहूं की फसल पर माहू कीट का प्रकोप
सहारनपुर। जनपद में सरसों और गेहूं की फसल पर माहू कीट का प्रकोप शुरू हो गया है। छोटे आकार का यह कीट पत्तियों और निकल रही बालियों का रस चूसकर फसल को कमजोर कर देता है। समय पर इस कीट पर नियंत्रण नहीं किया जाए तो फसल का उत्पादन प्रभावित होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास के तापमान पर और हल्के बादलों के समय इस कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ता है।
अचानक तापमान बढ़ने से सरसों और गेहूं की फसल पर माहू कीट का प्रकोप दिखाई देना शुरू हो गया है। इस कीट से प्रभावित फसल की पत्तियां पीली हो जाती हैं। इस समय सरसों की फसल में फूल निकल रहा है। कहीं कहीं 50 प्रतिशत से अधिक फली भी बन चुकी हैं। माहू से प्रभावित फसल के फूल गिर जाते हैं और फलियों में दाने नहीं बनते। इसके चलते प्रभावित फसल का उत्पादन प्रभावित होता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि सरसों और गेहूं की फसल को माहू कीट से बचाने के लिए कीटनाशकों का समय से प्रयोग करना चाहिए। छिड़काव दोपहर के बाद करना चाहिए। उन्होंने बताया कि क्यूनॉलफास 25 ईसी की एक एमएल मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे करना चाहिए। या डाइमेकोएट की एक एमएल मात्रा को प्रति लीटर पानी में छिड़काव करना फायदेमंद रहता है। इसके अलावा इमीडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत की 0.25 प्रतिशत मात्रा को एक लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे कराना मुफीद रहता है। उन्होंने बताया कि यदि फसल में लेडी बर्ड बिटिल या कोक्सीनेला जैसे मित्र कीट दिखाई दें तो कीटनाशकों के छिड़काव से बचना चाहिए। यह कीट प्रतिदिन 10 से अधिक माहू कीट को खाकर नष्ट कर देते हैं। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि माहू से प्रभावित फसल पर नीम ऑयल का प्रयोग भी किया जा सकता है।