देवबंद (सहारनपुर)। मदरसा जामिया कासमिया दारुत्तालीम वस्सना में आजादी में उलमा का किरदार शीर्षक पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने देश की आजादी में बुजुर्गों के सामूहिक योगदान को याद किया।
बुधवार को कासिमपुरा मार्ग स्थित मदरसा जामिया कासमिया दारुत्तालीम वस्सना में कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे मौलाना सालिम अशरफ ने कहा कि देश की आजादी में सभी धर्मों, वर्गों और जातियों की हिस्सेदारी रही है। यह हमारे बुजुर्गों का सामूहिक प्रयास था, जिसमें उलमा के तबके ने भरपूर योगदान व बलिदान दिया। उनके साथ हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई कदम से कदम मिलाकर चले।
दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि मुल्क को आजाद कराने में उलमा ने जो कुर्बानियां दी, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। इसके लिए हम उनके हमेशा कर्जदार रहेंगे। संस्था के मोहतमिम मौलाना इब्राहीम कासमी ने कहा कि लोकतंत्र वरदान है। इसकी सुरक्षा करना हमारा दायित्व है औ्र हमें देश के विकास के लिए एक साथ चलकर एकता, अखंडता, भाईचारे और सहयोग की भावना को विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि हम सांप्रदायिकता, सांप्रदायिक ताकतों और आतंकवाद का डटकर विरोध करेंगे।
मौलाना अब्दुल हन्नान, कारी सईद, मौलाना शाहआलम, कारी मौ. सलीम, सैय्यद जहीन अहमद और ख्वाजा सलीम अहमद ने संदेश दिया कि भारत तभी खुशहाल हो सकता है जब इसकी लोकतांत्रिक गरिमा को जीवित रखा जाए और संविधान के द्वारा सभी वर्गों को दिए गए अधिकारों को पालन हो। उन्होंने मदरसों व मुस्लिम शिक्षण संस्थाओं में गणतंत्र दिवस मनाने की अपील की। कार्यक्रम की शुरुआत मौ. सुफियान की तिलावत-ए-कलाम पाक व मौ. नौशाद की नात-ए-पाक से हुई। इस मौके पर डा. एसए अजीज, मुफ्ती मुनव्वर हुसैन कासमी, सैय्यद वजाहत शाह, सैफुल इस्लाम, मौलाना अबरार कासमी, कारी सईद आदि मौजूद रहे।