फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इतिहास की व्याख्याओं और भ्रांतियों पर मंथन

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। जेवी जैन कॉलेज के इतिहास विभाग में इतिहास की व्याख्याएं और भ्रांतियां विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें इतिहास के विशेषज्ञों ने इतिहास को लेकर अपने विचार रखे। इतिहास लेखन में कहां कमियां रहीं और क्या विशेषताएं हैं। इन पर भी खुलकर बात हुई।
विज्ञापन

सेमिनार की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. पीके वार्ष्णेय ने की। इतिहासकार डॉ. सतीश चंद्र मित्तल ने कहा कि इतिहास एक प्रक्रिया है, जो निरंतर प्रवाह मान रहती है। भारत की सभ्यता पिछले पांच हजार वर्ष से प्रवाह मान रही है। ब्रिटिश काल में भारतीय इतिहास लेखन में कई बार एकांगी दृष्टिकोण दिखाई देते हैं। आज के इतिहास को व्यापक एवं तार्किक परिपेक्ष में देखने की जरूरत है। शोधार्थी राजीव उपाध्याय यायावर ने क्षेत्रीय इतिहास के महत्व को रेखांकित करते हुए नवीन समावेशी इतिहास लेखन पर बल दिया। विभागाध्यक्ष डॉ. शशि नौटियाल और डॉ. वीके शर्मा ने भी विचार रखे। इस मौके पर डॉ. पूरणचंद शर्मा, डॉ. वंदना रुहेला, डॉ. श्वेता बंसल, डॉ. सीमा चौधरी, डॉ. नेहा, डॉ. सीमा मिश्रा, डॉ. विकास गर्ग, डॉ. सतेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें