फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब सहकारिता चुनाव में होगी वर्चस्व की जंग

विज्ञापन
विज्ञापन
सहारनपुर। नगरीय निकाय चुनाव में मचे घमासान के बाद अब जल्द होने वाले सहकारिता के चुनाव में सभी राजनीतिक दलों ने वर्चस्व बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। सियासी दलों की कोशिश साधन सहकारी समितियों के चेयरमैन से लेकर जिला सहकारी विकास संघ और जिला सहकारी बैंक के चेयरमैनी हथियाने को लेकर रहेगी। इसके लिए राजनीतिक दलों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं।
विज्ञापन

राजनीति की पहली सीढ़ी माने जाने वाले सहकारिता के चुनाव का विगुल बज गया है। राजनीतिक दलों ने अधिसूचना जारी होने के बाद साधन सहकारी समितियों के डायरेक्टर से लेकर डीसीडीएफ और डीसीबी में विभिन्न पदों पर विजय हासिल करने के उद्देश्य से गोटियां बैठानी शुरू कर दी हैं। इसके अलावा प्रादेशिक स्तर की सहकारी संस्थाओं और राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न सहकारी संस्थाओं में अपना प्रतिनिधित्व कायम रखने के लिए भी बिसात बिछाई जाने लगी है। सहकारिता की राजनीति को हमेशा प्रदेश में सत्ता के अनुकूल माना जाता है। अधिकांशतया जिस पार्टी की सरकार सूबे में होती हैं उसी का ही अधिक वर्चस्व रहता है। जनपद में जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन पद पर सपा के अरुण राणा काबिज हैं बोर्ड में भी अधिकतर सदस्य इसी राजनीति दल से ही जुडे़ माने जाते हैं। इसी प्रकार हाल तक सपा में रहे और अब भाजपाई हो चुके अभय चौधरी जिला सहकारी विकास संघ के चेयरमैन और पैकफेड के उपाध्यक्ष हैं। साधन सहकारी समितियों में भी सपा का दबदबा रहा है। जिले में 117 साधन सहकारी समितियों में से 115 में चुनाव होना है। इसके अलावा 5 क्रय विक्रय समितियां हैं। इसमें बहुमत कायम करके ही डीसीडीएफ और डीसीबी में वर्चस्व कायम किया जा सकता है। यहीं से तय होता है कि राज्य और राष्ट स्तर की सहकारी संस्थाओं में कौन से प्रतिनिधि जाएंगे। अब प्रदेश में सत्ताधारी भाजपा के लिए सहकारिता में सपा के वर्चस्व को तोड़ना बड़ी चुनौती मानी जा रही है। भाजपा ने सहकारिता चुनाव के जिला प्रभारी के तौर पर पूर्व जिलाध्यक्ष और सहकारिता के अनुभवी नेता राजपाल सिंह जुड्डा को जिम्मेवारी सौंपी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें