सहारनपुर। भारत में अब स्वच्छता की बात होने लगी है। लेकिन विडंबना यह है कि लोग मंगलयान में जा रहे हैं और भारत अभी तक स्वच्छता जैसी बेसिक चीजों के स्तर पर ही है। भाषण बहुत हो चुका अब करने का वक्त है। पॉलीथिन ने पर्यावरण को सबसे अधिक प्रदूषित किया है। पॉलीथिन के इस तूफान ने कपड़े और जूट के थैलों को उड़ा दिया है। लोगों को संकल्प लेना है कि पॉलीथिन का प्रयोग बंद कर दें, कपड़े और जूट के थैले का प्रयोग करें। सिर्फ इतना ही काम हो जाए तो शहर संवर जाए। गायों की सुरक्षा तब तक नहीं की जा सकती जब तक पॉलीथिन का प्रयोग बंद न हो। पॉलीथिन खाकर गायों की मौत हो रही है। प्रकृति जो चीज पैदा करती है उसको डिस्ट्राय भी कर देती है, लेकिन पॉलीथिन और प्लास्टिक बायोडिग्रेबल नहीं हैं। सदियों तक वैसे ही रहती हैं। न सिर्फ जमीन को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि पूरे पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त, सहारनपुर
स्वच्छ सोच से ही समाज स्वच्छ होगा
स्वच्छ सोच से ही स्वच्छ आचरण और फिर स्वच्छ समाज का निर्माण होता है। स्वच्छता का संबंध योग से है और योग वह विद्या है जिसने अपने नियमों में सबसे पहला स्थान ही स्वच्छता को दिया। जब हमारा मन स्वच्छ होगा तो हमारे विचार भी स्वच्छ होंगे और वातावरण भी स्वच्छ होगा। फिर पवित्रता की बयार न बहे, ऐसा नहीं हो सकता। सभी सफाई चाहते हैं, सुविधाएं भी हैं, लेकिन सफाई करना भूल जाते हैं। यह ध्यान नहीं रहता कि एक भी मौका किसी मच्छर को काटने का, मक्खी को भोजन पर या मुंह पर बैठने का मिला तो बीमारी मिल गई। गंदे हाथ किसी से मिला दिए तो बीमारी को परोस दिया। यह सोच की कोई और साफ करेगा, यह गलत है। इस सोच को ही बदलने की जरूरत है। सोच स्वच्छ होगी तो सारा माहौल वह स्वच्छ होगा। देश के संवरने की लहर बही है, इसमें सभी को जागरूकता और चेतना की आहुति प्रदान करनेे की जरूरत है।
-। पद्मश्री भारत भूषण, योगाचार्य, सहारनपुर
। 2 अक्तूबर 2018 तक हर गांव खुले में शौच से मुक्त होगा
जन-जन तक स्वच्छता का संदेश पहुंचाना है। अब मुहिम चल पड़ी है और यह मुहिम 2022 तक चलती रहेगी, जब तक पूरे देश को स्वच्छ नहीं बना लेंगे। इसी के तहत स्वच्छता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। गांवों में अभियान चलाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रहे हैं। नालियों की सफाई, सड़कों की सफाई, घरों की सफाई, कूड़े के निस्तारण के लिए बताया जा रहा है, लेकिन इस अभियान के तहत लोगों से अपेक्षित सहयोग का अभाव है। 2 अक्तूबर 2018 तक जिले का हर गांव खुले में शौच से मुक्त होगा। इसके लिए गली-गली बैठकें कर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। यह सभी अधिकारियों ने संकल्प लिया है। लोग अपना घर तो स्वच्छ रखना चाहते हैं, लेकिन दूसरे के दरवाजे पर, सार्वजनिक स्थान पर कूड़ा फेंकने में गर्व महसूस करते हैं। यह सोच बदलने की जरूरत है। इस कार्यक्रम से सोच बदलने में कामयाब हो सकेंगे। अमर उजाला की ओर से जो पहल हुई है उसके लिए वह साधुवाद देते हैं।
-। पीके पांडेय, जिलाधिकारी, सहारनपुर
--। स्वच्छता के लिए सोच बदलने की जरूरत है
स्वच्छता जैसी जिन चीजों पर कभी चर्चा नहीं होती थी, अब कार्यक्रम किए जा रहे हैं। गंदगी और अपराध कहीं भी होगी, उससे प्रभावित पूरा क्षेत्र होगा। गंदगी से बीमारी कहीं भी फैल सकती है, हर व्यक्ति बीमार हो सकता है और अपराधी कहीं भी घटना कर सकता है। इनके लिए न कोई परिवार है, न घर है और न कोई बाउंड्री है। घर की सफाई तो सभी करते हैं, लेकिन घर की गंदगी का निस्तारण कैसे और कौन करेगा। सोच बदलने की आवश्यकता है। सार्वजनिक स्थान की सफाई कैसे होगी, इसकी जिम्मेदारी भी खुद ही लेनी होगी। कोई गंदगी फैला रहा है तो झगड़ा न करके समझाकर उसे रोकना, टोकना है। हर आदमी अन्य 10 लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करने का संकल्प लें। जिससे सहारनपुर स्वच्छता के मामले में टॉप पर होगा।
-। बबलू कुमार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, सहारनपुर
--। अपना ही नहीं आसपास का भी ध्यान रखें लोग
स्वच्छता जागरूकता पहल के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए चलाए जा रहे अभियान से लोगों को स्वच्छता के प्रति नई सोच मिलेगी। नगर निगम एवं पंचायतें कूड़ा प्रबंधन के लिए कार्य करें। लोगों को जागरूक करें। लोग सकारात्मक सोच के साथ स्वच्छता अभियान से जुड़ें। 2019 तक जो सपना है कि पूरे भारत को स्वच्छ करने का इसे साकार करेंगे इस प्रकार का सभी संकल्प लें। जिससे न सिर्फ मोहल्ला, बल्कि पूरा शहर स्वच्छ होगा।
--। संजीव रंजन, मुख्य विकास अधिकारी, सहारनपुर।