उसने खुद को एमबीए-सीए बताते हुए आईआरएस अफसर बताया और घर आने जाने लगा। उसने घर वालों का विश्वास जीत लिया और युवती से शारीरिक संबंध भी बनाए। जब उसका व्यवहार क्रूर होने लगा तो युवती को शक हुआ और उसने उसकी छानबीन की। इसके बाद उसकी क्रिमिनल हिस्ट्री का पता चला कि वो अन्य को भी ऐसे ठग चुका है। बात खुलने पर आरोपी गायब हो गया लेकिन, युवती को अश्लील मैसेज भेजते हुए ब्लैकमेल करने लगा।
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पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म समेत संबंधित धाराओं में आरोप पत्र दाखिल किए। मामले की सुनवाई के उपरान्त अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दुष्कर्म का दोषी पाते हुए योगेश गर्ग उर्फ समीर गर्ग उर्फ राहुल को 10 वर्ष के कारावास और 50 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।