जामा मस्जिद दिल्ली के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी की कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील पर देवबंदी उलेमा आग बबूला हो उठे। उन्होंने साफ कहा कि मुसलमान कांग्रेस पार्टी के बंधुवा मजदूर नहीं हैं।
लोकसभा चुनाव में मुसलमानों का रुख अभी तक साफ नहीं है कि वे किस पार्टी के पक्ष में वोट डालेंगे, लेकिन सपा, बसपा और कांग्रेस मुस्लिमों के वोट बैंक को पक्ष में करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। सैय्यद अहमद बुखारी ने मुसलमानों से कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने की अपील पर देवबंदी उलेमा भड़क उठे। अरबी के विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि शाही इमाम की अपील सरासर गलत है, क्योंकि मुसलमान कांग्रेस पार्टी के बंधुवा मजदूर नहीं हैं। मुसलमान कांग्रेस को बार-बार आजमा चुके हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ धोखा ही मिला है। चुनाव में जनता सिर्फ सेक्युलर व्यक्ति को ही वोट दें वे चाहे हिंदू हो या मुस्लिम।
दारुल उलूम वक्फ के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती आरिफ कासमी ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में हर व्यक्ति को विचार रखने का अधिकार है। जनता खुद फैसला करें कि उसके वोट का सही हकदार कौन है। दारुल उलूम वक्फ के उस्ताद मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर ने कहा कि फिरकापरस्त ताकतों को रोकने के लिए जनता के पास कांग्रेस के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। क्योंकि दूसरी पार्टियां इस स्थिति में नहीं हैं जो वह ऐसी ताकतों का मुकाबला कर सकें।
नायब मोहतमिम ने इमाम की अपील खारिज की
दारुल उलूम के नायब मोहतमिम ने दिल्ली जामा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी की उस अपील को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने मुसलमानों से कांग्रेस के पक्ष में मतदान करने को कहा है।
नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक संभली ने शुक्रवार को दो टूक कहा कि जामा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी की कांग्रेस के हक में वोट देने की अपील करना उनकी निजी राय हो सकती है। क्योंकि हिंदुस्तान लोकतांत्रिक देश है और यहां हर व्यक्ति को अपने विचार रखने की पूरी आजादी है। लिहाजा शाही इमाम की अपील से मुसलमान कांग्रेस पार्टी को वोट देगा यह सोचना गलत है।
नायब मोहतमिम ने कहा कि जाति और धर्म में बंटकर देश को तोड़ने वालों को नहीं बल्कि कौम की सेवा करने वाले व्यक्ति को तरजीह देनी चाहिए। संभली ने कहा कि दारुल उलूम का सियासत से कोई ताल्लुक नहीं है। इसलिए उनका यह बयान निजी राय है इसे दारुल उलूम से जोड़कर न देखा जाए।
बुखारी के बयान पर बरेली के उलेमाओं की प्रतिक्रिया
बरेली के उलमा चाहे वे किसी भी मसलक या सिलसिले के हों शाही इमाम मौलाना अब्दुल्ला बुखारी के बयान पर टिप्पणी से पहले उनकी शख्सियत पर सवाल उठा रहे हैं। कह रहे हैं कि बुखारी हमेशा पाला बदलते रहते हैं। ऐसे में उनकी बात का कितना असर होगा?
प्रबंधक खानकाहे नियाजिया के शब्बू मियां नियाजी ने इमाम के बारे में कहा कि ऐसे रहनुमा पर कौम कैसे भरोसा करे जो मौसम की तरह मिजाज बदलने वाला हो। वह कौम की बेहतरी के लिए नहीं सोच सकता। उनका अपना जाती मफाद (निजी लाभ) शामिल होता है। जिसके लिए वह कौम को कुर्बान कर देते हैं। आज की कौम की खस्ताहाली के लिए ऐसे ही मजहबी नामनिहाद (तथाकथित) रहनुमा जिम्मेदार हैं। सबसे बढ़ जिसके अपन घर में ही बिखराव हो वे भला अवाम को कैसे एक कर सकते है।
नबीरे आला हजरत मौलाना बदर रजा खां के अनुसार मौलाना बुखारी के बयान से कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। अगर उनका इशारा कांग्रेस के लिए एक होने का है तो कांग्रेस खुद जब तक मुसलमानों की ओर नहीं बढ़ेगी और उनकी बात नहीं सुनेगी तब तक बहुत कुछ होने वाला नहीं है। मौलाना बुखारी तो वैसे भी वक्त के लिहाज से बदलते रहते हैं।
अब शाही इमाम के दामाद को लेकर अटकलें
शाही इमाम अब्दुल्ला बुखारी के कांग्रेस को वोट देने के बयान के बाद अब सियासी हलचल तेज हो गईं हैं। सपा के एमएलसी और इमाम के दामाद को लेकर कई तरह की अटकलें लगने लगी हैं। इस बयान के बाद अब सपा की चिंता बढ़ गई है।
वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में इमाम ने अपने दामाद को सपा से टिकट के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया। सपा ने तमाम विरोध के बाद भी उमर अली को बेहट विधानसभा सीट से उतारा। हालांकि सहारनपुर में सपा को इसका नुकसान हुआ, मगर वह प्रदेश के मुसलमानों को शाही इमाम के जरिए जोड़ने का दावा करती रही। यही कारण है कि जमानत जब्त होने के बाद भी शाही इमाम के दामाद को पार्टी ने एमएलसी बनाया।
अब लोकसभा चुनाव से ऐन पहले शाही इमाम के इस बयान के बाद सपा में उमर अली का भविष्य तलाशा जा रहा है। हालांकि इससे पहले सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव और शाही इमाम के बीच पिछले कुछ महीने पहले बढ़ी तल्खी के बाद भी एमएलसी ने इस्तीफा दे दिया था। बाद में उन्होंने बयान भी दिया था कि शाही इमाम को त्यागपत्र दिया। आगे का फैसला वहीं करेंगे। दिन बीतने के साथ ही मामला सुलझ गया, मगर, इस सियासी घटनाक्रम से अब नए समीकरण के कयास लगाए जा रहे हैं।
आजम ने की इमाम से अपील
प्रदेश के नगर विकास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां ने जामा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुखारी से अपील की है कि वो लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस को समर्थन करने के अपने ऐलान पर पुनर्विचार करें।
आजम खां ने एक बयान जारी कर शाही इमाम से कहा है कि आप जिम्मेदार मुकाम पर हैं। आपके बयान से मिल्लते एत्तेहाद का पैगाम जाना चाहिए। कहा कि यूपी में खासतौर पर कमजोर कांग्रेस के लिए आपकी अपील से मुसलमानों की ताकत बंट जाएगी और इसका फायदा फासिस्ट ताकतों को होगा।
आजम खां ने अहमद बुखारी से विनम्र अपील की है कि कांग्रेस की हिमायत के ऐलान पर दोबारा संजीदगी से गौर फरमाएं।