रामपुर। जिले में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को शून्य पर लाने के उद्देश्य से रामपुर पुलिस ने जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। योजना के तहत सड़क हादसों के बाद सबसे अहम माने जाने वाले गोल्डन आवर में घायलों तक तत्काल सहायता पहुंचाने, समय पर अस्पताल पहुंचाने और दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि रोकने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए पुलिस ने विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।
जिले में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसे प्रशासन और पुलिस के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान चली जाती है, जबकि बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। इसी को देखते हुए रामपुर को जीरो फैटेलिटी जिला बनाने की पहल की गई है।
योजना के पहले चरण में सिविल लाइंस, शहजादनगर, मिलक, टांडा और बिलासपुर थाना क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग और नैनीताल हाईवे समेत अन्य प्रमुख सड़कें गुजरती हैं, जहां दुर्घटनाओं की संभावना अधिक रहती है। प्रत्येक थाना क्षेत्र में एक उपनिरीक्षक और चार पुलिसकर्मियों की क्रिटिकल कॉरिडोर टीम गठित की गई है। ये टीमें अन्य संबंधित विभागों के साथ भी समन्वय स्थापित करेंगी।
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हादसे की सूचना मिलते ही पहुंचेगी टीम
दुर्घटना की सूचना मिलते ही क्रिटिकल कॉरिडोर टीम तत्काल मौके पर पहुंचेगी। टीम की प्राथमिकता घायलों को सुरक्षित निकालने, एंबुलेंस उपलब्ध कराने और गोल्डन आवर के भीतर निकटतम अस्पताल पहुंचाने की होगी। इसके लिए पुलिस कंट्रोल रूम, यूपी-112, स्वास्थ्य विभाग और एंबुलेंस सेवाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो।
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ब्लैक स्पॉट की निगरानी, तेज रफ्तार पर भी कार्रवाई
योजना के तहत दुर्घटना संभावित ब्लैक स्पॉट की निगरानी की जाएगी। सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाने, ओवरलोडिंग और यातायात नियमों के उल्लंघन के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जाएंगे। साथ ही लोगों को सड़क सुरक्षा और दुर्घटना के बाद घायलों की मदद के लिए जागरूक किया जाएगा।
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यह है गोल्डन आवर
सड़क दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा (60 मिनट) चिकित्सकीय दृष्टि से गोल्डन आवर कहलाता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यदि इस अवधि में घायल को प्राथमिक उपचार और अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सा मिल जाए तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना का मुख्य उद्देश्य इसी गोल्डन आवर का अधिकतम उपयोग करते हुए हर घायल तक सबसे कम समय में सहायता पहुंचाना है।
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योजना की प्रमुख बातें
पांच थाना क्षेत्रों से योजना की शुरुआत।
प्रत्येक थाने में क्रिटिकल कॉरिडोर टीम का गठन।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और एंबुलेंस का तत्काल रिस्पॉन्स।
गोल्डन आवर के भीतर घायल को अस्पताल पहुंचाने पर विशेष फोकस।
ब्लैक स्पॉट की निगरानी और यातायात नियमों का सख्ती से पालन।
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सड़क हादसों में मौतों की दर शून्य करने के लिए पुलिस की ओर से जीरो फैटेलिटी योजना लागू की गई है। इसके तहत घायलों को तत्काल इलाज उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। पांचों थानों में क्रिटिकल कॉरिडोर टीम गठित कर उन्हें प्रशिक्षित भी किया गया है। -अनुराग सिंह, एएसपी
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301 लोगों की मौत हुई साल भर में
जिले में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में जिले में लगभग 494 सड़क दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 301 से अधिक लोगों की मौत हुई। वहीं, वर्ष 2026 के शुरुआती महीनों में ही 100 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 80 लोगों की जान जा चुकी है।