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नवरात्र का पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा-अर्चना कर श्रद्धालुओं ने रखा व्रत

सार

शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मां भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की।श्रद्धालुओं ने घरों में भी माता के छंद गए और पूजन कर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया।संतान प्राप्ति के लिए स्कंदमाता की आराधना करना लाभकारी माना गया है।
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विस्तार
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रामपुर। शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मां भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने माता से शक्ति का वरदान मांगा। घरों में पूजा करने के बाद श्रद्धालु मंदिर भी पहुंचे और मां की आराधना की।
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पांचवें नवरात्र पर शुक्रवार की सुबह श्रद्धालुओं ने मां स्कंदमाता का पूजन किया।नवरात्र व्रत की कथा का पाठ किया और फिर दुर्गा चालीसा और आरती की। अज्ञारी में कपूर-लौंग के साथ पूजन किया और कई श्रद्धालुओं ने दुर्गा सप्तशती का पाठ भी किया। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में भी माता के दर्शन किए। नगर के श्री त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ, मनोकामना मंदिर, प्राचीन श्री दुर्गा मंदिर, श्री हरि मंदिर, नर्मदेश्वर महादेव मंदिर, माई का थान, पंडित दत्तराम शिवालय आदि मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई। श्रद्धालुओं ने घरों में भी माता के छंद गए और पूजन कर दुर्गा सप्तशती का पाठ किया। आचार्य डॉ. राधेश्याम वासंतेय ने बताया कि स्कंदमाता को मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता के रूप में पूजा जाता है। स्कंदमाता भक्तों की समस्त कामनाओं की पूर्ति करती हैं। संतान प्राप्ति के लिए स्कंदमाता की आराधना करना लाभकारी माना गया है। स्कंदमाता की पूजा से भक्त को मोक्ष मिलता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनकी पूजा से भक्त अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है।
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