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Rampur News: नया विधायक चुनने में आधी आबादी की भूमिका होगी अहम

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रामपुर। रामपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में जीत का सेहरा किसके सिर पर बंधेगा, इसका बात का पता तो 08 दिसंबर को दोपहर के बाद चलेगा। लेकिन एक बात तो तय है कि नया विधायक चुनने में आधी आबादी की भूमिका अहम होगी। क्योंकि सीट पर महिला मतदाताओं की संख्या 1.82 लाख है और महिलाएं बढ़ चढ़कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल भी करती हैं।
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रामपुर विधानसभा सीट पर महिलाओं की हिस्सेदारी की भाग की जाए तो अब हुए चुनाव में सिर्फ दो बार महिला विधायक निर्वाचित हुई हैं। रामपुर की पहली महिला विधायक बनने का गौरव किश्वर आरा बेगम को है, जो 1962 में इस सीट से निर्वाचित हुई थीं। इसके बाद 2019 में जब रामपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ तो आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा को जीत हासिल हुई थी। जबकि इस सीट पर 18 बार चुनाव और एक बार उपचुनाव हो चुका है। इस सीट पर हुए 19 चुनावों में सिर्फ दो बार महिलाएं निर्वाचित हुई हैं। इस सीट पर गौर करें तो यहां पुरुषों का ही वर्चस्व रहा है। आजादी के बाद हुए पहले चुनाव की बात की जाए तो फजल उल हक जीते थे। 1951 में वह कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे और रामपुर के पहले विधायक बने थे। इसके बाद असलम खां ने जीत हासिल की। वह 1957 में दूसरे विधायक बने थे। 1962 में रामपुर की पहली विधायक बनीं थीं किश्वर आरा बेगम। कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने शहर के पहले विधायक फजल उल हक को 21523 वोटों से शिकस्त दी थी। यह उस वक्त की बड़ी जीत में शामिल थी लेकिन, इसके बाद मतदाताओं ने किसी महिला प्रत्याशी पर भरोसा नहीं जताया। 1967 से 2017 तक हुए चुनाव में पुरुष विधायक ही बने। इसमें सबसे लंबे अर्से तक लगभग 35 साल तक आजम खां विधायक रहे हैं। 1962 के बाद 2019 में इस सीट पर हुए उपचुनाव में तजीन फात्मा जीती थीं। 2022 के विधानसभा चुनाव में आजम खां फिर से जीत गए थे।
आजम खां की विधायकी रद्द होने के बाद इस सीट पर उपचुनाव हो रहा है। इस उपचुनाव में एक भी महिला प्रत्याशी नहीं है। विधायक तो कोई पुरुष ही बनेगी, लेकिन उसकी सफलता में महिला मतदाताओं का अहम योगदान होगा। इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 3.88 लाख है, जिसमें महिला मतदाता 1.82 लाख हैं, जो जिले अन्य विधानसभा सीटों के मुकाबले अधिक है। इस सीट पर महिला मतदाताओं का मतदान करने का औसत लगभग 65.89 फीसदी है। ऐसे में यह तय है कि इस बार जीत का सेहरा उसके सिर ही बंधेगा जिसको महिला मतदाताओं का समर्थन मिलेगा।
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