जिले की ग्रामीण संसद में अगले पांच साल तक नारी शक्ति का दबदबा रहेगा। हाल ही में हुए ग्राम पंचायत चुनावों में 53 फीसदी ग्राम पंचायतों में प्रधान पद पर महिलाओं ने जीत दर्ज की है। ग्राम पंचायत के चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था है।
जिले में कई ग्राम पंचायतों में बिना आरक्षण के भी महिला प्रत्याशियों ने ताल ठोंकी और जीत दर्ज की। महिला प्रत्याशियों ने पुरुष प्रत्याशियों को सियासत के मैदान में जबरदस्त शिकस्त दी। 684 ग्राम पंचायतों में 366 में प्रधान की कुर्सी पर महिला काबिज हुई हैं। इसलिए इनकी ताकत को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।
हाल ही में ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्य के लिए हुए चुनावों की मतगणना की प्रक्रिया पूरी हुई है। रविवार को नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान शपथ लेंगे। शपथ लेने वाले ग्राम प्रधानों में आधी आबादी की उपस्थिति 50 फीसदी से अधिक होगी। जिले में 684 ग्राम पंचायतों में प्रधान पद के लिए हुए चुनावों में 33 फीसदी सीट महिलाओं के लिए आरक्षित थीं।
लेकिन इससे कहीं अधिक महिलाओं ने चुनाव मैदान में ताल ठोंकी। इसके साथ ही अपनी सीट जीतकर ये दिखाया कि सियासत के मैदान में वे पुरुषों से आगे निकलने का जज्बा रखती हैं। इसकी परिणाम ये रहा कि जिले की ग्रामीण संसद में देश की आधी आबादी कही जाने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी 50 फीसदी से भी अधिक रही।
सैदनगर ब्लॉक में 83 में से 53 सीटों पर महिला ग्राम प्रधान चुनी गईं हैं, जोकि करीब 63 फीसदी है। स्वार में महिला प्रधानों की भागीदारी करीब 48 फीसदी है। बात संख्या में की जाए तो स्वार में सबसे अधिक 149 ग्राम पंचायतें होने से सबसे अधिक महिला ग्राम प्रधान स्वार क्षेत्र से हीं हैं। स्वार से 73 महिला ग्राम प्रधान चुनी गई हैं।