रामपुर। नवाबों के शहर रामपुर के अधिकांश मोहल्लों की अपनी अलग ही पहचान है। करीब दो सौ साल का इतिहास समेटे हुए शहर के मोहल्ला मैगजीन की भी कहानी काफी रोचक है। बताते हैं कि रामपुर के नवाब हामिद अली खां के दौर में यहां हथियारों का भंडार होता था, जिसमें तोप से लेकर मैगजीन तक रखी जाती थी, लेकिन आग लगने की वजह से तोपखाना जलकर राख हो गया था और उस वक्त भारी नुकसान हुआ था, जिसके बाद नवाबी हथियार भंडार गृह को तोपखाना रोड पर शिफ्ट कर दिया गया। मगर, यह स्थान मैगजीन मोहल्ले के नाम से पहचाना जाने लगा।
रामपुर शहर नवाबों का शहर रहा है। रामपुर के नवाबों ने यहां करीब ढाई सौ साल से ज्यादा राज किया। दस नवाबों ने यहां रामपुर रियासत पर राज किया। नवाबी शासन में रामपुर को बेशकीमती तोहफे भी दिए। नवाबी शासन की यादें आज भी ताजा हैं। रामपुर के नवाबों ने शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ा योगदान दिया। रामपुर ही ऐसा जिला है, जहां सबसे ज्यादा सरकारी इंटर काॅलेज हैं। इसकी प्रमुख वजह यह भी है कि नवाबी दौर में बने भवनों को स्कूल के रूप में विकसित किया गया। पहले नवाब खुद और बाद में इसे सरकार ने ले लिया। रामपुर में तमाम ऐतिहासिक भवन और मोहल्ले नवाबों की यादों को ताजा करते हैं। इसी तरह के तमाम मोहल्लों का इतिहास नवाब से जुड़ा हुआ है।
रामपुर के नवाबों ने शहर को अपने हिसाब से बसाया। इसी तरह रामपुर के बरेली गेट के पास स्थित मैगजीन मोहल्ले का भी इतिहास है। इस मोहल्ले का इतिहास भी कुछ अलग ही है। रियासत काल के जानकार शौकत अली खां ने भी अपनी पुस्तक रामपुर का इतिहास में जिक्र करते हैं कि रामपुर को साल 1775 में बसाया गया था। उस वक्त इस रियासत के संस्थापक और पहले शासक नवाब फैजुल्लाह खां ने सुरक्षा की दृष्टि से शाहबाद से हटकर रामपुर नगर को बसाना शुरू किया। नवाबों का हथियार का भंडार पहले बरेली गेट के पास स्थित मोहल्ला मैगजीन में होता था। नवाब हामिद अली खां के समय में एक दिन अचानक हथियार भंडार गृह में आग लग गई, जिसके चलते यहां के हथियार भंडार गृह को शहर के दूसरे कोने में शिफ्ट किया गया जो कि अब तोपखाना गेट मोहल्ले के नाम से जाना जाता है। बताते हैं कि पुराने हथियार भंडार गृह को खाली करने के बाद यहां पर मोहल्ला बस गया, जिसका नाम मैगजीन पड़ गया।
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-नवाब हामिद अली खां के समय हथियार गृह में अचानक आग लगी, जिसके बाद यहां के हथियार भंडार गृह को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया और इस मोहल्ले का नाम मैगजीन पड़ गया।
नफीस सिद्दीकी, इतिहासकार
बोले स्थानीय लोग
अब यहां बस्ती बन चुकी है। नए मकान भी बन चुके हैं, लेकिन इस मोहल्ले का इतिहास भी अनोखा है। उनको इसके बारे में जानकारी है।-फरीद
-पुराने लोग तो यही बताते रहे हैं कि यहां पर पहले नवाबों का असलहा रखा जाता था, लेकिन बाद में इसे दूसरी जगह शिफ्ट किया गया।-जुनैद