सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हटी थी सील
जौहर यूनिवर्सिटी में शत्रु संपत्ति का मामला कई साल से चल रहा है। इस मामले में जहां एक ओर एमपी-एमएलए कोर्ट में मामला चल रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की ओर से दो साल पहले भी इस जमीन पर कब्जा लिया गया था,लेकिन बाद में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रशासन को इसकी सील हटानी पड़ी थी। इस बीच शत्रु संपत्ति विभाग भी हाईकोर्ट पहुंच गया था। अफसरों का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश पर शत्रु संपत्ति को कब्जे में लेने के आदेश दिए गए थे।
जौहर यूनिवर्सिटी में स्थित शत्रु संपत्ति को कब्जे में लेने के आदेश दिए गए थे। इस आदेश के बाद जमीन को कब्जे में लेने का काम शुरू कर दिया गया है। यहां पर 13.08 हेक्टेयर जमीन है,जिसमें 45 गाटा है। इस जमीन को कब्जे में लेकर शत्रु संपत्ति विभाग के सुपुर्द कर दिया जाएगा। - मोनिका सिंह, एसडीएम सदर
शत्रु संपत्ति मामले में उर्दू अनुवादक ने दर्ज कराए बयान
आजम खां पर दर्ज शत्रु संपत्ति पर कब्जा कर जौहर यूनिवर्सिटी में शामिल करने के मामले में बृहस्पतिवार को पुलिस में तैनात उर्दू अनुवादक सुहेल खां ने कोर्ट में पेश होकर अपने बयान दर्ज कराए। उनकी मुख्य परीक्षा पूरी हो गई है। जिरह के लिए एक अगस्त की तारीख तय की गई है।
सपा नेता आजम खां के खिलाफ वर्ष 2019 में कई मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें शत्रु संपत्ति कब्जाने का भी मामला है। यह मामला सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अलमा जमीर रिजवी ने अजीमनगर थाने में दर्ज कराया था। इसमें जौहर ट्रस्ट के चेयरमैन आजम खां समेत अन्य सदस्यों को नामजद किया था।