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Rampur News: कुओं के नाम पर पड़ा शहर के दो मोहल्लों का नाम

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रामपुर। नवाब हामिद अली खां के शासन में शहर में दो कुएं खोदे गए थे। खास बात यह थी कि इनमें से एक कुएं से मीठा और दूसरे कुएं से खारा पानी आता था। इन कुओं से क्षेत्र की पहचान बन गई। समय बदला और लोगों की कुओं पर निर्भरता खत्म हो गई तो ये कुएं भी बदहाल हो गए लेकिन इनकी विशेष पहचान के कारण शहर के दो मोहल्लों का नाम इन कुओं के नाम पर पड़ा गया। एक मोहल्ले का नाम मीठा कुआं और दूसरे मोहल्ले का नाम खारी कुआं जाना जाने लगा। रामपुर में करीब पौने दो सौ साल तक नवाबों का शासन रहा। इस दौरान अलग-अलग नवाबों ने शहर को अपने हिसाब से बसाया। नवाबों के शासनकाल की तमाम ऐतिहासिक चीजें अभी भी रामपुर को एक अलग पहचान दिलाती हैं। इन्हीं में से एक है ऐतिहासिक रजा लाइब्रेरी। इतिहासकार बताते हैं कि रामपुर शहर बसाने के दौरान यहां के मोहल्लों का नाम भी कहीं न कहीं नवाबों के शासनकाल से ही जुड़ा है। शहर के अधिकतर मोहल्ले का नामकरण नवाबों के समय में हुआ और वही नाम अभी तक लोगों के जेहन में है।
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शहर के बीचोंबीच बसे दो मोहल्ले मीठा कुआं और खारी कुआं का इतिहास काफी रोचक है। इतिहासकारों के अनुसार नवाब हामिद अली खां के समय में दो कुएं खोदवाए गए थे। एक कुएं से मीठा पानी निकला तो थोड़ी दूर पर खोदे गए दूसरे कुएं से खारा पानी निकला। मीठे पानी वाले कुएं का लंबे समय तक इस्तेमाल होता रहा लेकिन खारा पानी लोग नहीं पी पाते थे। उसका इस्तेमाल अन्य कामों में कर लेते थे। समय बदला और कुएं क्षतिग्रस्त होने के साथ सूख भी गए। हालांकि, इन कुओं के पानी के स्वाद के चलते इनके नाम पर मोहल्लों का नाम मीठा कुआं और खारी कुआं पड़ गया।

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नवाब हामिद अली खां के शासनकाल में शहर में दो कुओं को खोदा गया था। एक कुएं से खारा तो दूसरे से मीठा पानी निकलता था। इसलिए इन कुओं के नाम पर शहर के दो मोहल्लों का नाम खारी कुआं और मीठा कुआं पड़ा गया।
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- नफीस सिद्दीकी, इतिहासकार
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