रामपुर। पुलिस को चकमा देकर भीम सेना के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष सतपाल तंवर शनिवार रात सिलईबड़ा गांव पहुंच गए। उन्होंने दो पक्षों के विवाद में गोली लगने से जान गंवाने वाले 17 वर्षीय छात्र सुमेश के परिजनों से मुलाकात की। साथ ही 17 मार्च को गांव में ही दलित महापंचायत करने का एलान कर दिया। उनकी घोषणा के बाद से पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों में खलबली मची है। छात्र की मौत के बाद सिलईबड़ा गांव में गहमागहमी बनी हुई है। शनिवार देर रात भीम सेना के प्रमुख सतपाल तंवर के सिलईबड़ा गांव में पहुंचने की सूचना मिली थी, जिस पर प्रशासन अलर्ट हो गया। शहर के आंबेडकर पार्क पर पुलिस की कई गाड़ियां लगाकर तंवर को रोकने के प्रयास किए गए लेकिन वे चकमा देकर गांव पहुंच गए। गांव में दाखिल होने से पहले सतपाल तंवर की गाड़ियों को रोक लिया गया। उनके साथ आई भीम सेना की टीमों की जानकारी रजिस्टर में लिखी गई। सतपाल तंवर को कई घंटे तक नजरबंद रखा गया। इसके बाद उन्हें इस शर्त पर पीड़ित परिवार के पास जाने की अनुमति दी कि वे वापस लौट जाएंगे।
तंवर पीड़ित परिवार से मिलकर वहीं खाना खाकर ग्रामीणों के घर पर ठहर गए। सतपाल तंवर की गांव में मौजूदगी से पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। अधिकारी भी पूरी रात गांव में डटे रहे। सतपाल तंवर ने प्रशासन की मौजूदगी में रविवार सुबह ग्रामीणों और पीड़ित परिवार की सहमति से 17 मार्च को दलित महापंचायत की घोषणा की। उन्होंने देश भर के बहुजन दलित समाज, सभी संगठन, संस्थाओं और विपक्षी राजनीतिक दलों से 17 मार्च को अधिक से अधिक संख्या में सिलईबड़ा गांव पहुंचने की अपील की।