करगिल शहीद बलजीत सिंह की 17वीं बरसी पर ग्रामीणाें व क्षेत्रवासियों द्वारा श्रद्घांजलि अर्पित की गई, मगर कोई भी अधिकारी श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचा, बल्कि राजस्व निरीक्षक ने शहीद की मां को शाल ओढ़ाकर खानापूर्ति की। परिजनों ने प्रशासनिक उपेक्षा की निंदा की है।
कोतवाली के ग्राम नबाबगंज निवासी करनैल सिंह का सबसे छोटा पुत्र बलजीत सिंह सेना की सिख रेजीमेंट में तैनात था। वह नौ जुलाई 1999 को करगिल युद्घ के दौरान दुश्मन की गोली के शिकार हो गए थे। उनकी बरसी के मौके पर मंगलवार की सुबह छह बजे नवाबगंज गुरुद्वारे में रखे गए पाठ का भोग डाला गया।
अरदास के दौरान मौजूद परिजनों एवं क्षेत्रवासियों ने उन्हें श्रद्घांजलि अर्पित की। सभी ने देश के अन्य करगिल शहीदों को भी श्रद्घांजलि अर्पित की। डेरा कारसेवा वाले बाबा अनूप सिंह, शहीद की माता शमशेर कौर, ग्राम प्रधान दीपेंद्र सिंह नेगी दीपू, रणजीत सिंह, मंजीत सिंह अटवाल, सुखदेव सिंह, मलकीत सिंह, हरजीत सिंह, हरभजन सिंह पन्नू, कमरुददीन, आदि ने शहीद की प्रतिमा पर भी श्रद्घा सुमन अर्पित किए।
बाद में राजस्व निरीक्षक बृजेश शर्मा ने अपने साथियों नसीर अहमद, मोहम्मद यासीन, ग्राम प्रधान दीपू के साथ प्रतिमा पर श्रद्वांजलि अर्पित कर शहीद की मां शमशेर कौर को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। जबकि, शहीद के परिजनों का आरोप था कि प्रशासन ने शहीद के नाम पर जो भी घोषणाएं की थीं, उन पर 16 वर्ष बाद भी कोई भी अमल नहीं हुआ है। उक्त संदर्भ में तहसीलदार अशोक कुमार ने बताया कि एसडीएम व वह कहीं बाहर हैं, इसलिए कानूनगो को भेज दिया था।