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Rampur News: 28 पेज में है आजम-अब्दुल्ला की बेगुनाही की कहानी

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रामपुर। पड़ोसी पर हमले के मामले सपा नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम समेत चारों आरोपियों की बेगुनाही की 28 पेज में दर्ज है। अदालत ने 28 पेज के फैसले में सभी को बरी कर दिया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ डेढ़ सौ पेज की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। साथ ही अभियोजन की ओर से कुल सात गवाह भी पेश किए थे।गंज थाना क्षेत्र में जेल रोड निवासी मोहम्मद अहमद ने 2019 में सपा नेता आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम, भाई शरीफ अहमद व भतीजे बिलाल खां के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें घर में घुसकर जानलेवा हमला करने, रंगदारी मांगने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया था। आरोपियों पर 452, 323, 504, 386, 307, 120बी आईपीसी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीर्ट कोर्ट में दाखिल की थी।
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शनिवार को एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट डाॅ. विजय कुमार ने फैसला सुना दिया। पुलिस ने सपा नेता समेत चारों आरोपियों पर गुनाह साबित करने के लिए डेढ़ सौ पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। साथ ही अभियोजन की ओर से सात गवाहों के बयान भी दर्ज कराए थे। मेडिकल रिपोर्ट भी पेश की। कोर्ट का जब फैसला आया तो कोर्ट ने अभियोजन की ओर से पेश दलीलों को नकारते हुए सपा नेता समेत चारों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
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कोर्ट की टिप्पणी

- अभियोजन पक्ष आरोपी शरीफ खां, बिलाल, आजम खां और अब्दुल्ला आजम पर लगाए आरोपों को साबित कर पाने में नाकामयाब रहा। अभियोजन की ओर से पत्रावली पर उपलब्ध मौखिक एवं प्रलेखीय साक्ष्य की विवेचना एवं विश्लेषण के आधार पर न्यायालय का यह निष्कर्ष है कि अभियोजन पक्ष आरोपियों पर लगाए गए आरोपों को साबित करने में पूर्णत: असफल रहा है। परिणाम स्वरूप अभियुक्तों को उन पर लगाए गए आरोपों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है।
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अभियोजन की यह रही दलील
अ़भियोजन पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि मुकदमे के वादी मोहम्मद अहमद व दूसरे गवाहों ने घटना को साबित किया है। साथ ही मेडिकल करने वाले डाॅक्टर ने भी चोटों को साबित किया है। पत्रावली पर आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं। अभियोजन की ओर से सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की नजीरें भी दी गईं।
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बचाव पक्ष की ये रही दलील
बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुधीर सरन कपूर एवं नासिर सुल्तान ने कहा कि रिपोर्ट पूरी तरह राजनीतिक रंजिश के आधार पर दर्ज कराई गई है। वादी मुकदमा मोहम्मद अहमद का आजम खां और उनके भाई से सिविल कोर्ट में जमीन को लेकर विवाद चल रहा था और गवाहों के बयानों में भी काफी विरोधाभास है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट की विधि व्यवस्थाओं का हवाला दिया। साथ ही तर्क दिया कि घटना के दो दिन बाद मेडिकल कराया गया है। इस तरह की कोई घटना नहीं हई।


फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेगी सरकार
रामपुर। पड़ोसी पर हमले के मामले में सपा नेता आजम खां समेत चारों आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सरकार अब हाईकोर्ट में अपील करेगी। जिला शासकीय अधिवक्ता अमित सक्सेना ने बताया कि फैसले का अध्ययन कर रहे हैं। अध्ययन के बाद सरकार की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की जाएगी। संवाद
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प्रकरण में कब क्या हुआ
घटना28 अगस्त 2019
मुकदमा29 अगस्त 2019
चार्जशीट-20 जनवरी 2020
आरोप तय- 25 जुलाई 2022
आरोपियों के 313 के बयान-13 सिंतबर 2023
सुनवाई पूरी-18 दिसंबर 2023
फैसला23 दिसंबर 2023
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करीब दो घंटे कोर्ट में रहे आजम खां
पेश के लिए आजम खां सीतापुर जेल से सुबह करीब नौ बजे रवाना हुआ था। वहीं आजम करीब दो बजे कोर्ट पहुंच गए। उसी समय अब्दुल्ला को भी हरदोई जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने साढ़े तीन बजे अपना फैसला सुनाया। इसके बाद करीब चार बजे आजम अब्दुल्ला अपनी-अपनी जेल के लिए रवाना हो गए। आजम करीब दो घंटे तक कोर्ट में रहे।
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