शाहबाद। कुदरत की मार और सिस्टम की बेरुखी के बीच अन्नदाता एक बार फिर खून के आंसू रोने को मजबूर हो गया है। अभी पिछले साल हुई फसल की बर्बादी का हिसाब-किताब बाकी है। मुआवजे की फाइलें दफ्तरों के चक्कर ही काट रही थीं कि आसमानी आफत ने दूसरी फसल को भी खराब कर दिया। कर्ज के दलदल में धंसे किसान के सामने अब सिर्फ नई मुसीबत खड़ी हो गई है।
पिछले साल बारिश के दौरान तहसील क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसानों की धान की फसल प्रभावित हुई थी। फसल खराब होने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि शासन-प्रशासन की ओर से सर्वे कराकर उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। कई किसान मुआवजे की आस लगाए रहे लेकिन समय बीतता गया। किसानों का कहना है कि पिछले नुकसान की भरपाई अभी तक नहीं हो सकी है और अब दोबारा बारिश ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। इस बार भी अधिकांश जगहों पर फसल तैयार होने के करीब पहुंच चुकी थी। फसल से अच्छी पैदावार और आमदनी की उम्मीद थी लेकिन लगातार हुई बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया। कई स्थानों पर धान की फसल गिरकर पानी में डूब गई है। इससे किसानों को पैदावार प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है। उधर किसानों का कहना है कि पिछले साल भी फसल खराब होने के बाद उन्होंने मुआवजे की उम्मीद में इंतजार किया था। उन्हें लगा था कि प्रशासन की ओर से आर्थिक मदद मिलने पर अगली फसल की तैयारी में सहारा मिलेगा लेकिन इंतजार लंबा होता गया। अब जब इस साल भी फसल बारिश की चपेट में आ गई है तो किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। किसानों ने प्रशासन से पिछले और इस साल के फसल नुकसान का सर्वे कराकर शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग की है।
वर्जन
बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है और अभी भी जिन किसानों की धान की फसल बारिश से खराब हुई है। उनको मुआवजा दिलाने के लिए फीडिंग का काम चल रहा है। पिछले मुआवजा नहीं मिला था इसके बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन इस बार फसल के नुकसान का मुआवजा मिल जाए उसके लिए प्रयासरत है।
आदेश कुमार, एसडीएम शाहबाद
मेरी 15 बीघा में पिछले साल धान की फसल बारिश के कारण खराब हो गई थी। मुआवजे के इंतजार में समय बीतता चला गया लेकिन अभी तक नहीं मिला। इस बार फिर बारिश के कारण फसल खराब हो गई। प्रशासन को दोनों साल का खराब फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा देना चाहिए।
गुल मोहम्मद, किसान मढ़ेया तुलसी गांव
पिछले साल 20 बीघा खेत में धान की फसल की थी। पिछले साल भी फसल खराब हो गई थी। मुआवजे के लिए तहसील में और हल्का लेखपाल अभिलेख भी दिए थे। लेकिन आज तक मुआवजा नहीं मिला। आज तक मुआवजे के इंतजार में है। इस बार भी भगवान भरोसे है।
राजकुमार, किसान नरेंद्रपुर
पिछले साल आठ एकड़ में धान की फसल की थी और वो बारिश के कारण खराब हो गई थी। बहुत कम धान की पैदावार हुई थी। करीब एक लाख का नुकसान हुआ था। पिछले साल मुआवजा नहीं मिला था।
रंजीत यादव, भाकियू नेता