रामपुर। गर्मी की तपिश और उड़ती धूल के बीच शहरवासियों का हाल बेहाल है लेकिन नगर पालिका के पास मौजूद सड़क स्वीपिंग मशीनें इस मुसीबत की घड़ी में भी वर्कशॉप में पड़ी धूल फांक रही हैं।
साल 2012 में शासन स्तर से करीब 30 लाख रुपये की दो मशीनें (एक छोटी, एक बड़ी) शहर की सफाई के लिए दी गई थीं लेकिन इनका हाल यह है कि ये अब सिर्फ ईद, दीपावली और होली जैसे त्योहारों पर ही सड़कों पर नजर आती हैं। बाकी दिन या तो चालकों की कमी के चलते खड़ी रहती हैं या फिर वर्कशॉप में मरम्मत के नाम पर खड़ी रहती हैं। इनकी अवधि (लाइफ) भी निकल चुकी है और नई मशीन का आना भी फिलहाल टल गया है। जहां एक तरफ सफाई कर्मियों की भरमार है
संसाधनउपकरण संख्या-
जेसीबी-7
ट्रैक्टर-ट्रॉली -10
सड़क स्वीपिंग-2
कूड़ा गाड़ी40
टैंकर-7
पोकलैंड मशीन-2
ठेलियां 60
एक चक्कर में लगता पांच लीटर तेल
रामपुर। सड़क स्वीपिंग मशीन की कीमत जितनी महंगी है, उतना ही इसका तेल खर्च भी है। इस मशीन को एक बार के चक्कर में कम से कम पांच लीटर तेल का खर्चा आता है। यही वजह है कि नगर पालिका इनको सिर्फ खास मौकों पर निकालती है।
मेन पावर
सफाई कर्मचारी :-
संविदा-परमानेंट-250
आउटसोर्स-500
सड़कों पर जंग लगे रिक्शे, वर्कशॉप में नए खड़े
रामपुर। शहर में मोहल्लों में कचरा उठाने के लिए रिक्शे लगा रखे हैं। यह रिक्शे इतने जर्जर हो चुके हैं कि इनमें जंग लग चुकी है, लेकिन बावजूद इसके वर्कशॉप में 150 नए रिक्शे रखे हुए हैं, लेकिन इनको अभी नहीं निकाला जा रहा। बारिश होने पर इनमें जंग लग रही है।
टीन शेड न होने से खुले में खड़े वाहन हो रहे खराब
रामपुर। कुछ मशीनों के आगे टीन शेड पड़ा हुआ है तो यहां पर तो वाहन बारिश में नहीं भीगते लेकिन अन्य वाहन बारिश होने पर भीगते रहते हैं, जिससे इनमें खड़े-खड़े जंग लग जाती है। यह वर्कशॉप पूरी तरह से कवर नहीं है।
क्या कहते हैं लोग
इस गर्मी में धूल के गुब्बार उड़ते हैं, जिससे इसकी धूल सीधे आंखों पर जाती है और मसलने पर आंख में इन्फेक्शन हो जाता है। सड़क साफ करने के लिए मशीन है लेकिन सड़क पर दिखाई नहीं देती।-अमित
गर्मी के वक्त सड़कों पर सुबह-शाम झाड़ू लगना चाहिए ताकि शहर साफ लगे और हम लोगों को भी दिक्कत न हो लेकिन इस मशीन को अब तक हमने ईद और दीपावली, होली पर ही चलते देखी है, उसके बाद नियमित तौर पर आज तक नहीं चली। -रामरतन
कई बार अन्य शहरों में जाना होता है तो वहां पर ऐसी ही मशीन आए दिन सड़कों पर दिख जाती है। साथ में पानी छिड़काव वाली मशीन भी साथ चलती है, लेकिन यहां पर तो मशीनें होने के बाद भी दिखाई नहीं देतीं।-रवि यादव
एक तरफ कचरे और नाले की गंदगी और उस पर गर्मी के बीच सड़क की धूल से होश उड़ जाते हैं। गर्म हवाओं के बीच जब यह धूल उड़ती है तो हर कोई ठहर जाता है। ऐसे समय में तो इस मशीन को चलाना चाहिए।-कृष्णपाल
वर्जन
अभी नई सड़क स्वीपिंग मशीन आने वाली है। इसके बाद नई स्वीपिंग मशीन से साफ-सफाई कराई जाएगी। किसी भी व्यक्ति को धूल और गंदगी से दो-चार नहीं होना पड़ेगा।
-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी, रामपुर