रामपुर। कोरोना को मात देकर जब दो वर्षों बाद स्कूल दोबारा शुरू हुए तो बच्चों की स्थिति काफी खराब हो गई थी। बच्चे स्कूल या तो आते नहीं थे या फिर रोते-रोते आया करते थे। ऐसे में स्कूलों में शिक्षकों ने धीरे-धीरे बच्चों को अच्छा माहौल देकर उनकी मनोस्थिति बदल दी। अब वही बच्चे स्कूल हंसते-हंसते आते हैं। कोरोना काल में जब स्कूल बंद हुए थे तो ज्यादातर बच्चे मोबाइल और टीवी तक ही सीमित हो गए थे। बच्चे पढ़ाई और अनुशासन भूलने लगे थे। उनको पढ़ाई रास नहीं आती थी। वहीं, इस स्थिति में स्कूल प्रशासन भी बच्चों की स्थिति से काफी परेशान था। धीरे-धीरे शिक्षकों ने बच्चों के साथ बातचीत करके उनको कक्षा में सहज महसूस करवाया। बच्चों को खेल और अन्य क्रियाकलाप से जोड़ना शुरू किया। हालांकि अभी भी मेहनत करने की आवश्यकता है।