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Rampur News: सीएचसी में कम पड़े स्ट्रेचर, घायलों को गोद में उठाया

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रामपुर। सोमवार तड़के बस दुर्घटना के बाद घायलों को सीएचसी में इलाज के लिए लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल 14 लोगों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। हालांकि, सीएचसी में स्ट्रेचर कम पड़ने पर परिजन व अन्य लोग घायलों को गोद में उठाकर एंबुलेंस तक ले गए। बस पलटने के बाद घायल हुए 50 से ज्यादा यात्रियों को एंबुलेंस सीएचसी पहुंचाया गया। घायलो में कई बच्चे भी थे। सीएचसी पहुंचे अधिकतर घायलों ने कहा कि हादसे के समय वे सो रहे थे। बस पलटने पर झटका लगा और आंख खुली तो चीखपुकार मची हुई थी। लोग एक-दूसरे के ऊपर पड़े हुए थे।
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कुछ घायलों ने कहा कि झटका लगा और बस अचानक सड़क के नीचे पलट गई। एकबार को लगा कि जान नहीं बचेगी, लेकिन भगवान ने दूसरी जिंदगी दे दी। थोड़ी ही चोट लगी। बस में मौजूद रीना अपनी बहन राधा और भाई विकास के साथ सीएचसी में बैठी काफी दहशत में दिखाई दीं। वहीं घायल सत्यपाल और उनकी पत्नी गुड्डी व बेटी मुस्कान भी डरे हुए दिखे। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद बड़ी मुश्किल से बस से बाहर निकल पाए।
हादसे के बाद राणा शुगर मिल कर्मियों के साथ ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। डायल 112 पर तैनात कांस्टेबल रेहान अहमद और होमगार्ड अजय यादव बस में फंसे सवारियों के लिए मददगार बने। साथ ही मौके पर तीन एंबुलेंस भी जल्द ही पहुंच गईं। सभी ने घायलों को बस से बाहर निकाला और सीएचसी में भर्ती कराया। गनीमत रही की हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।
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बस यात्री बोले-
मैं कुरुक्षेत्र से आ रहा था। मुझे बदायूं जाना था। हादसे के समय मैं सो रहा था। बस पलटने पर झटका लगा तब आंख खुली। हादसे के बाद का मंजर काफी डरावना था। - देव प्रकाश, इस्माइलपुर कासगंज।

हम हरियाणा में मजदूरी करते हैं। मैं बस में सो रही थी। अचानक झटका लगा और बस में सब चीखने लगे। बस पलटने के बाद उसमें से निकलने का रास्ता तक नहीं मिल रहा था। - विमलेश, बरेली

हरियाणा के कैथल से आ रहे थे। मेरी गोद में मेरी बेटी पूजा बैठी हुई थी। जब बस पलटी तो बेटी दूर जा गिरी। गनीमत रही कि उसे गंभीर चोट नहीं आई। भगवान ने दूसरी जिंदगी दी। - सुमनलता, बरेली


मैं अपनी मां के साथ चंडीगढ़ में मजदूरी करती हूं। घर आ रहे थे। जब बस पलटी तो अंदर काफी देर तक लोग चीखते रहे। लोगों ने आकर मुश्किल से निकाला। - राजवती


बस चालक की जल्दबाजी से हादसा हुआ है। बस अगर धीरे चलती होती तो हादसा नहीं होता। बहुत लोगों के चोट आई है। - विमला गुरगांव, बदायूं


मेरे गुम चोटें आई है। हादसा काफी डरावना था। हमारे साथ वाले कई लोगों को गंभीर चोट आई है। - अंशू, चंदौसी संभल

मेरे बहुत गंभीर चोटें हैं। एंबुलेंस तक जाने के लिए स्ट्रेचर नहीं मिला तो हमारे साथ आए हुए लोगों ने एंबुलेंस तक पहुंचाया है। -भोले, महेवा

अंबाला से आ रहे थे। ऐसा लगा जैसे बस चालक को झपकी आ गई और सामने से आ रहे ट्रक से बचने के चक्कर में बस पलट गई। मेरे बहुत गुम चोटें आई हैं। - हरिओम, सुल्तानपुर

हिमाचल प्रदेश से आ रहे थे। जब हादसा हुआ तो मैं सो रही थी। झटका लगने पर आंख खुली तो एक के ऊपर एक आदमी पड़ा था। बड़ी मुश्किल से बाहर निकले। - देव कुमारी, कादरचौक बदायूं


हिमाचल प्रदेश के बद्दी से आ रहे थे। घर से थोड़ी दूर रह गए थे और हादसा हो गया। बस में ज्यादातर लोग सो रहे थे। सिर में काफी चोटें आईं। - चमन, गांव अनवा, शाहबाद
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हिमाचल प्रदेश के बद्दी से आ रहे थे। मेरे साथ में मम्मी और पत्नी थीं। तीनों एक ही सीट पर सो रहे थे। पता ही नहीं चला कब बस पलट गई। - बाबूराम, बदायूं


चंडीगढ़ से आ रहे थे। घर बरेली जा रहे थे। बस तेज चल रही थी और पलट गई। सीएचसी में बहुत देर के बाद मेरा नंबर आया और पट्टी हुई। - अजयपाल, बरेली

मम्मी पापा के साथ गए थे। बस तेज चल रही थी। सामने से आ रहे ट्रक से बचने के के चक्कर में बस पलट गई। बड़ी मुश्किल से बाहर निकले। - नीलम, आंवला, बरेली


मैं अपने बीमार पिता को देखने आ रहा था। बस बहुत तेज चल रही थी और अचानक पलट गई। मेरी पत्नी रेशमा के बहुत चोटें आई हैं। - दिलदार, दातागंज बदायूं
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