रामपुर। रोडवेज डिपो से प्रतिदिन विभिन्न स्थानों के लिए 89 बसों का संचालन किया जा रहा है लेकिन किसी में मेडिकल किट उपलब्ध नहीं है। कई बसों में मेडिकल किट रखने के लिए लगाए गए बॉक्स जर्जर होकर टूट चुके हैं या फिर गायब हैं। आकस्मिक स्थिति में यात्रियों को ही नहीं, चालकों और परिचालकों को भी परेशानी हो सकती है। समस्या की जानकारी के बावजूद जिम्मेदार बेपरवाह बने हुए हैं।
रामपुर रोडवेज डिपो से रोजाना हजारों की संख्या में यात्री सफर करते हैं। इस दाैरान अगर किसी यात्री की तबियत खराब हो जाए या चोट लग जाए तो प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी मेडिकल किट नहीं मिलेगी। खास ताैर पर लंबी दूरी की बसों में मेडिकल किट न होना जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर करती है। यह स्थिति तब है जबकि चार माह पहले ही पुलिस भर्ती परीक्षा के दाैरान बसों में 40 मेडिकल किट उपलब्ध कराई गई थी। परीक्षा के बाद यह कहां चली गई इस संबंध में चालक-परिचालक और जिम्मेदार अधिकारी एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं।
कुछ चालक-परिचालकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि त्योहार या फिर किसी बड़ी परीक्षा के दौरान मुरादाबाद से किट मंगाई जाती है लेकिन इसके बाद फिर वापस ले ली जाती है। दूसरी ओर रामपुर रोडवेज डिपो प्रभारी रामप्रकाश का कहना है कि संज्ञान में आया है कि पुरानी बसों में जो चालक-परिचालक हैं वो अपने निजी इस्तेमाल के लिए किट लेकर चले जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिन बसों में मेडिकल किट नहीं होगी, उनके चालकों-परिचालकों के वेतन से कटाैती की जाएगी।
मेडिकल किट में क्या रहता है सामान
रामपुर। मेडिकल किट में सामान्य तौर पर बुखार और दर्द की दवाएं, मरहम-पट्टी, बरनॉल, लिक्विड आयोडीन, बीटाडीन समेत प्राथमिक उपचार में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री रहती है। लंबी दूरी की यात्रा के दौरान इनकी जरूरत अक्सर पड़ती है लेकिन उपलब्ध नहीं हो पाता है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और अस्वस्थ यात्रियों के लिए ऐसी सुविधा महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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नीलामी के लिए चिह्नित...फिर भी दाैड़ रहीं सात बसें
रामपुर रोडवेज डिपो में सात बसों को नीलामी के लिए चिह्नित किया गया है। इसका प्रस्ताव भी मुख्यालय को भेजा गया है। इसके बावजूद बसों का संचालन खतरे से खाली नहीं है। इस संबंध में रोडवेज डिपो प्रभारी रामप्रकाश का कहना है कि निर्धारित अवधि शेष होने के कारण नीलामी के लिए प्रस्तावित बसों का फिलहाल अलग-अलग रूटों पर संचालन किया जा रहा है।