टांडा। शनिवार तड़के टांडा के मुख्य बाजपुर मार्ग पर दिल्ली की आईटी कंपनी के मालिक की कार के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना को केवल तेज रफ्तार या चालक को झपकी आने का परिणाम मानना पर्याप्त नहीं है।
पिछले दो माह में इस मार्ग पर तीन बड़े सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें छह लोगों की जान जा चुकी है और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसके बावजूद सड़क किनारे खड़े वाहनों पर रोक नहीं लगी, अवैध अस्थायी अतिक्रमण नहीं हटाया गया और सड़क किनारे रखे ट्रांसफार्मरों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट नहीं किया गया।
शनिवार सुबह सीएचसी टांडा के सामने हुए भीषण हादसे में जिम कॉर्बेट जा रहे अभिषेक अग्निहोत्री, कार्तिकेय, नीरज और गुलबुद्दीन की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। इससे पहले 27 मई को दढ़ियाल रोड पर सड़क किनारे खड़े ट्रक से कार टकराने पर बिजनौर निवासी जितेंद्र सिंह की मौत हो गई थी। वहीं, नौ जून को मीना बाजार चौराहे पर दो डंपरों की भिड़ंत में गंभीर रूप से घायल चालक मुजम्मिल ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
हर बड़े हादसे के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करते हैं, निर्देश देते हैं और कार्रवाई के दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। सड़क किनारे भारी वाहन दोबारा खड़े मिलते हैं, अतिक्रमण फिर फैल जाता है और ट्रांसफार्मर आज भी सड़क से सटे लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं।
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कोई प्रभावी अभियान नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर के मुख्य मार्ग पर सड़क किनारे खड़े ट्रक और डंपर, अवैध अस्थायी अतिक्रमण तथा अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था रोज दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। इसके बावजूद न तो प्रभावी अभियान चलाया जा रहा है और न ही जिम्मेदार विभाग स्थायी समाधान की दिशा में कोई कदम उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन अब भी नहीं चेता तो टांडा का मुख्य मार्ग लोगों की जान लेता रहेगा और हर हादसे के बाद केवल औपचारिक कार्रवाई व जांच के दावे ही किए जाते रहेंगे।