रामपुर। शहर के तीन जगहों पर श्रीरामलीला का मंचन धूमधाम से किया गया। सनातन धर्म रामलीला में ताड़का वध का दृश्य देख दर्शक रोमाचिंत हो गए तो वहीं ज्वालानगर की आदर्श रामलीला कमेटी के मंचन में राम जन्म की लीला ने हर किसी को उत्साहित कर दिया। इसके अलावा श्री हरि आदर्श रामलीला कमेटी की ओर से हुई रावण तपस्या और मनु शत्रुघ्न की तपस्या का दृश्य ने रोमांच भर दिया।
उत्सव पैलेस रामलीला ग्राउंड सोमवार को सुबह 9 बजे रासलीला और श्रीकृष्ण की निकुंज लीलाओं से दिन का शुभारंभ हुआ। मंच पर जब नटखट कृष्ण की बाल लीलाओं और उनकी प्रेममयी लीलाओं का जीवंत चित्रण हुआ तो पूरा पंडाल तालियों की गूंज से गूंज उठा। इसके बाद धनुष यज्ञ, रावण–वाणासुर संवाद, धनुष भजन और जयमाल जैसे प्रसंग जब मंच पर साकार हुए तो हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया। मंचन में दिखाया गया कि रावण के साम्राज्य विस्तार की महत्वाकांक्षा और वाणासुर की प्रतिज्ञा को बड़े ही सशक्त अभिनय के साथ दिखाया गया। रावण की गर्जना और वाणासुर की वाणी ने रामलीला मैदान में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दर्शक राम-सीता के विवाह का अलौकिक दृश्य देखकर खुशी से झूम उठे। भगवान श्रीराम ने शिव धनुष तोड़े जाने के बाद जनकपुरी में उल्लास का वातावरण दिखाया गया। रंग-बिरंगे वस्त्रों और भजनों के बीच बरात का आगमन, जयमाल और विवाह की रस्में मंचित हुईं। श्रीराम और माता सीता के विवाह में जनसमूह तालियों और जयघोष के साथ झूम उठा। अंत में राजा जनक के कन्यादान का भावुक प्रसंग दिखाया गया। मंचन में विवाह मंडप, वेद मंत्रों की ध्वनि और पुष्पवृष्टि ने वास्तविक विवाह जैसा दृश्य रहा। इससे पूर्व मुख्य अतिथि हरीश चंद्र अग्रवाल, प्रवेश कुमार अग्रवाल, घनश्याम अग्रवाल और भारत भूषण अग्रवाल की मौजूदगी रही। इस मौके पर अध्यक्ष विष्णु शरण अग्रवाल, महामंत्री वीरेंद्र कुमार गर्ग, सह अध्यक्ष सुनील कुमार गोयल सोनी ताऊ, सुभाष चन्द्र अग्रवाल ठेकेदार, ईश्वर सरन अग्रवाल, विनोद कुमार गुप्ता ठेकेदार, वेद प्रकाश वर्मा आदि मौजूद रहे।
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श्रीराम ने किया अहिल्या का उद्वार
रामपुर। श्री आदर्श रामलीला कमेटी ज्वाला नगर में सोमवार रात अहिल्या उद्धार, गंगा दर्शन पुष्प वाटिका का मनमोहक मंचन दिखाया गया। राधिका कृष्ण कला मंडल वृंदावन मथुरा के कलाकारों ने बेहद खूबसूरती के साथ मंचन किया।
मंचन में दिखाया गया कि ताड़का, मारीच और सुबाहु के वध के बाद श्रीराम, लक्ष्मण और ऋषि विश्वामित्र आगे बढ़ते हैं और अहिरौली पहुंचते हैं, जहां श्रीराम गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या को शाप से मुक्त करते हैं। अहिल्या के उद्धार के बाद श्रीराम, लक्ष्मण और विश्वामित्र मुनि गंगा पार कर जनकपुर की ओर बढ़ते हैं। आगे बढ़ते हुए वे जनक जी के उद्यान पहुंचते हैं। जनक जी श्रीराम और लक्ष्मण का बड़े सम्मान के साथ स्वागत करते हैं, उन्हें अपने महल में ले जाते हैं और उन्हें उच्च स्थान पर बिठाते हैं। वहां श्रीराम जनकपुर देखने जाते हैं, जहां शहर के बच्चे उन्हें शहर की सुंदरता दिखाते हैं। शहर की शोभा देखने के दौरान पूरे नागरिक श्रीराम को देखने के लिए भीड़ लगाते हैं। जब सुबह होती है, गुरु विश्वामित्र श्रीराम को पुष्प वाटिका से फूल तोड़ने के लिए भेजते हैं। वहां सीता और श्रीराम पहली बार एक दूसरे को देखते हैं। पहली अमराई के बाद, सीता गौरा मंदिर जाती है, जहां गौरा सीता को उसके मन की सभी इच्छाएं पूरी होने का आशीर्वाद देती है। दूसरी ओर श्रीराम भी गुरु विश्वामित्र को फूल अर्पित करते हैं, जहां विश्वामित्र भी श्रीराम को पूजा के बाद उनकी सभी इच्छाएं पूरी होने का आशीर्वाद देते हैं। इस अवसर पर सुरेश अग्रवाल, अवधेश शर्मा, डॉ. तेजवीर यादव, त्रिभुवन पंडित, अनुज सक्सेना, आशु गुप्ता, डाॅ. अनिल सक्सेना, मोहित मल्होत्रा, चितरंजन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
ताड़का वध कर श्रीराम ने की यज्ञ की रक्षा
रामपुर। श्री हरि आदर्श रामलीला कमेटी सिविल लाइंस की ओर से हुई श्रीराम लीला के मंचन में विश्वामित्र आगमन, ताड़का वध, सुबाहू वध की की लीला का मंचन दिखाया गया।
रात करीब नौ बजे से शुरू हुई रामलीला के मंचन में दिखाया गया किमुनि विश्वामित्र राजा दशरथ के दरबार में पहुंचे। विश्वामित्र ने राजा दशरथ से यज्ञ की रक्षा को श्रीराम-लक्ष्मण को मांगा। राजा से आज्ञा लेकर राम-लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र के साथ वन पहुंचे। इस दौरान विश्वामित्र ने ऋषियों की समस्याओं से श्रीराम को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि ऋषि मनोयोग से अपना यज्ञ करते हैं, लेकिन हर बार राक्षस उसको तहस-नहस कर देते हैं और ऋषियों को भी इसमें क्षति होती है। राक्षसों के बढ़ते अत्याचार को रोकने के लिए उन्होंने श्रीराम को यहां बुलाया था। इस दौरान यज्ञ शुरू होते ही राक्षसों ने विघ्न डालना शुरू किया। एक साथ कई राक्षस आ गए, जिसको श्रीराम ने मार गिराया। इसके बाद ताड़का के आने पर श्रीराम ने उसका भी वध कर दिया। इसके साथ सुबाहु का वध भी कर दिया। वध होते ही रामलीला मैदान जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। मंचन के बाद आरती पाठ किया गया। इस मौके पर अमर नाथ खनेजा, राकेश जुनेजा समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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